
बिलासपुर। शहर में स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने के बाद बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं। वहीं बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह सटीक हैं और प्राप्त शिकायतों की जांच कराई जा रही है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जहां हर महीने ₹1,500 से ₹2,000 तक बिजली बिल आता था, वहीं अब ₹5,000 से ₹7,000 तक के बिल मिलने लगे हैं। उनका आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद अचानक बिजली खपत बढ़ी हुई दिखाई जा रही है। शिकायत लेकर बिजली विभाग पहुंचने पर मीटर की जांच तो की जाती है, लेकिन बाद में बिल को सही बताते हुए उपभोक्ताओं को लौटा दिया जाता है।
बिजली विभाग के अधीक्षण यंत्री (शहर) पी. श्रीनिवास राजू ने कहा कि स्मार्ट मीटर और पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर की कार्यप्रणाली में कोई अंतर नहीं है। स्मार्ट मीटर केवल बिजली की खपत की रियल-टाइम और अधिक सटीक जानकारी उपलब्ध कराते हैं। जिन उपभोक्ताओं की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, उनकी जांच कराई जा रही है।
विभाग का यह भी कहना है कि कुछ मामलों में पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर की रीडिंग कम दर्ज हुई थी या किसी कारण से छूट गई थी, जिसका समायोजन अब नए बिलों में दिखाई दे रहा है। इससे कुछ उपभोक्ताओं के बिल अधिक आए हैं।
बिलासपुर शहर में स्वीकृत 1.45 लाख स्मार्ट मीटरों में से अब तक 1.05 लाख से अधिक मीटर लगाए जा चुके हैं। इधर उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक बढ़े हुए बिलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक कारण सार्वजनिक नहीं किए जाते, तब तक लोगों की शंकाएं दूर नहीं होंगी। स्मार्ट मीटरों को लेकर बढ़ते विवाद के बीच बिजली विभाग पर शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
