

बिलासपुर। साइबर ठगी के शिकार लोगों को जल्द से जल्द उनकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए बिलासपुर रेंज में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज , वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में रेंज के सभी साइबर थाना प्रभारियों को साइबर फ्रॉड में ठगी गई राशि की वापसी (मनी रेस्टोरेशन) की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया।
आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि साइबर अपराधों में केवल बैंक खाताधारक आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। पुलिस की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब पीड़ित की ठगी गई रकम उसे वापस मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को मनी रेस्टोरेशन की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

प्रशिक्षण के दौरान भारत सरकार के आई4सी (Indian Cyber Crime Coordination Centre) के अंतर्गत संचालित एनसीआरपी पोर्टल के दो महत्वपूर्ण मॉड्यूल—मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल और ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल—की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि फ्रीज किए गए खातों से कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पीड़ितों की राशि वापस कैसे कराई जाए, वहीं गलती से फ्रीज हुए निर्दोष लोगों के बैंक खातों को पोर्टल के माध्यम से डी-फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यक्रम में बताया गया कि बिलासपुर की एसीसीयू टीम ने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से अब तक 2.36 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए हैं, जबकि 60 मामले वर्तमान में प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं। इस उपलब्धि पर आईजी राम गोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह ने एसीसीयू प्रभारी गोपाल सतपति एवं उनकी टीम की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की।
एसएसपी भोजराम पटेल ने मुंगेली जिले में मनी रेस्टोरेशन के सफल प्रयोग को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका समाधान करते हुए इसे अन्य जिलों में भी प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में आईसीआईसीआई बैंक के विशेषज्ञ कमलेश वाल्दे ने भी जानकारी दी कि साइबर ठगी की रकम लौटाने के लिए बैंकों को किन कानूनी दस्तावेजों और न्यायालयीन आदेशों की आवश्यकता होती है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि साइबर अपराधों में संलिप्त आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी चल-अचल संपत्तियों का विवरण तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए, ताकि मुकदमे के दौरान आरोपी संपत्ति का हस्तांतरण न कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर पीड़ितों को क्षतिपूर्ति दिलाई जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि साइबर ठगी का शिकार व्यक्ति थाने पहुंचने पर उसे थाने और साइबर सेल के बीच भटकाया न जाए। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई कि साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें अथवा एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर समय रहते राशि सुरक्षित कराने का प्रयास करें।
