

बिलासपुर। स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान जगन्नाथ का प्राकट्य महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान के दिव्य दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।

श्री सिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर में भगवान जगन्नाथ का भव्य महाअभिषेक एवं सहस्त्रधारा स्नान वैदिक मंत्रोच्चार, स्तुति और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। मंदिर के श्री गोपाल कृष्ण रामानुज दास ने बताया कि स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ अपने गर्भगृह से बाहर आकर मंडप में विराजमान होते हैं और भक्तों को दुर्लभ दर्शन देते हैं। इस दिन महोदधि के पवित्र जल, जड़ी-बूटियों एवं सुगंधित पदार्थों से युक्त 108 कलशों के जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है। अभिषेक के उपरांत भगवान का हाथी वेश में मनोहारी श्रृंगार कर विशेष भोग अर्पित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भगवान के लिए विशेष रूप से ओडिशा से कटी वस्त्र मंगवाए गए थे। सुगंधित पुष्पों और तुलसी से सुसज्जित भगवान जगन्नाथ का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। महाआरती के पश्चात भक्तों को ओडिशा का प्रसिद्ध महाप्रसाद वितरित किया गया।

इस धार्मिक आयोजन में श्री गोपाल कृष्ण रामानुज दास, श्री शत्रुघन कृष्ण, श्री अनिमेष सोनी, आचार्य शांतनु पांडे, आशीष यादव, शुभम मिश्रा, वैदिक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा पर महाअभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ कुछ दिनों तक अनसर (अस्वस्थावस्था) में रहते हैं। इस दौरान वे भक्तों को दर्शन नहीं देते। इसके पश्चात स्वस्थ होने पर रथ यात्रा के शुभ अवसर पर भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर आरूढ़ होकर नगर भ्रमण करते हैं तथा भक्तों को दर्शन देकर उनका कल्याण करते हैं।
