

पंचम पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी की शहीदी दिवस जो कि 18 जून को है आज सुबह और शाम का विशेष दीवान चल रहा है जिसमें जम्मू से आए भाई साहब जगतार सिंह जी कीर्तन कर संगत को निहाल कर रहे है गुरु अर्जन देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1563 में पंथ के चौथे गुरु गुरु रामदास जी और माता भानी जी के यहां हुआ था वे सिख धर्म के पांचवे गुरु थे इन्होंने हरमंदिर साहिब की नींव रखी और आदि ग्रन्थ का संपादन किया इन्होंने दसवंत निकालने और जरूरतमंद लोगों किं भलाई में लगने की प्रथा चालू की ।

गुरु अर्जन देव जी को सन 1606 में उस समय के मुगल शासक जहांगीर ने बड़ी ही अमानवीय यातनाएं दी लेकिन इतनी यातनाएं सहने के बाद भी गुरु महराज जी अपने सत्य के मार्ग चलते रहे गुरु अर्जन देव जी सिख धर्म के पहले शाहिद थे उन्हें लाहौर की भीषण गर्मी में गर्म तवे के ऊपर बैठा के उनके ऊपर गर्म रेत डाली गई तब भी गुरु अर्जन देव जी वाहेगुरु जी का सिमरन कर गुरु भक्ति में लीन थे कुछ दिनों तक ये यातनाएं सहने के बाद गुरु महराज जी ने रावी नदी के ठंडे जल में समाधि ले ली इतनी गर्मी में गर्म रेत उनके ऊपर डाली जाती थी जो असहनीय थी इसी लिए इस दिन ठंडे जल (छबील)का लंगर सिख समाज लगता है 18 जून को शहीदी दिवस गुरुद्वारे में बड़ी श्राद्ध और सम्मान के साथ मनाया जाएगा जिसकी तैयारी में प्रबंधक कमेटी लगी हुई है
