एम्बुलेंस में गूंजी नन्ही किलकारी: आपातकालीन टीम की सूझबूझ से सुरक्षित हुआ ‘पहाड़ी कोरवा’ जनजाति की महिला का प्रसव

गंभीर स्थिति में नवजात को सीपीआर (CPR) देकर EMT संतोष यादव ने बचाई जान, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ,,

राजधानी रिपोर्टर/ सौरभ साहू
बलरामपुर/रामानुजगंज, छत्तीसगढ़।।

बलरामपुर/राजपुर- दिनांक 7 जून 2026 को जिला बलरामपुर में मानवता और तत्परता का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। यहाँ आपातकालीन सेवा 108 की टीम ने सूझबूझ और त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए न केवल एक सुरक्षित प्रसव कराया, बल्कि बेहद नाजुक स्थिति में पहुँच चुके नवजात शिशु को सीपीआर (CPR) देकर नया जीवनदान भी दिया।।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, विशेष रूप से कमजोर ‘पहाड़ी कोरवा’ जनजाति से आने वाली 26 वर्षीय प्रसूता ननकी (पति: गतो सेवारी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) राजपुर से मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के लिए रेफर (IFT) किया जा रहा था। इसी दौरान अंबिकापुर रोड पर ‘हरीतिमा’ के पास मरीज को तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईएमटी (EMT) संतोष यादव ने एम्बुलेंस को रोककर सुरक्षित प्रसव कराने का निर्णय लिया। दोपहर ठीक 3:10 बजे एम्बुलेंस में ही एक नन्हे बच्चे का जन्म हुआ।

शिशु की थम चुकी थी सांसें, सूझबूझ से बची जान

जन्म के तुरंत बाद मामला बेहद गंभीर (Critical) हो गया था। नवजात शिशु के शरीर में कोई हलचल नहीं थी और केवल पल्स (नब्ज) ही चल रही थी। ऐसे नाजुक क्षणों में बिना वक्त गंवाए ईएमटी संतोष यादव ने अपनी ट्रेनिंग का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने तुरंत नवजात को सीपीआर (CPR), बैग वाल्व मास्क (BVM) और ऑक्सीजन सपोर्ट देना शुरू किया। 108 टीम के इस अथक प्रयास से शिशु की सांसें वापस लौट आईं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया भर्ती

प्राथमिक उपचार और दोनों के वाइटल्स (Vital Signs) स्थिर होने के बाद, माँ और बच्चे को तुरंत सुरक्षित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) राजपुर में स्थानांतरित (Shift) किया गया। वर्तमान में माँ और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित हैं।

“दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों में इस तरह सुरक्षित प्रसव कराना हमारी टीम के लिए गर्व की बात है। आज हमारी टीम ने मानवता की सच्ची सेवा की है। पूरी टीम को इस तत्परता के लिए बधाई।” —
राकेश कुमार, जिला प्रबंधक (EME) सरगुजा छत्तीसगढ़

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