
बिलासपुर। कान्हा किसली में रिसोर्ट निर्माण के नाम पर 3 करोड़ 15 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में फरार चल रहे तीन आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली है। अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश अनिल प्रभात मिंज की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भले ही अपराध किसी एक व्यक्ति के खिलाफ किया गया हो, लेकिन इस तरह के आर्थिक अपराध केवल व्यक्तिगत नहीं होते, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करते हैं। ऐसे अपराध कानून-व्यवस्था और सामाजिक विश्वास को कमजोर करते हैं। न्यायालय ने यह भी माना कि इस चरण में आरोपियों को राहत देने से पुलिस जांच प्रभावित हो सकती है।
मामले में आरकेबीटेक फर्म की भागीदार मंजूलता पाठी (50), निवासी विकास नगर, रश्मि बाला भोसले (56), निवासी विकास नगर तथा उत्सव भोसले (32), निवासी जरहाभाठा के खिलाफ सिविल लाइन थाने में अपराध दर्ज है।
शिकायतकर्ता विशाल सिंह चंदेल ने पुलिस को बताया कि उसकी पहचान आर्किटेक्ट एवं बिल्डर दीपेंद्र पाठी तथा कुसुमाकर राव भोसले से थी। वर्ष 2017-18 में दोनों ने कान्हा किसली में ‘आईलैंड पार्क रिसोर्ट’ विकसित करने के नाम पर आर्थिक सहयोग मांगा था। परिचय और भरोसे के आधार पर उसने कोरोना काल के दौरान किस्तों में कुल 3.15 करोड़ रुपए दिए।
रकम वापस मांगने पर आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे। दबाव बनने पर 3 जुलाई 2024 को एक एग्रीमेंट किया गया, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया। आरोप है कि आरोपियों ने आरकेबीटेक फर्म के करोड़ों रुपए के चेक दिए और बाद में संबंधित बैंक खाता ही बंद करा दिया।
लेजर बुक छिपाने का भी आरोप
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फर्म की लेजर बुक छिपा दी थी, जिससे वित्तीय लेन-देन की जानकारी प्रभावित हुई। इसी आधार पर मामले में साक्ष्य छिपाने से संबंधित धारा 201 भी जोड़ी गई है।
पुलिस जांच में बैंक ऑफ बड़ौदा, व्यापार विहार शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार आरकेबीटेक फर्म पहले से ही 463.40 लाख रुपए के ऋण मामले में डिफॉल्टर घोषित हो चुकी थी।
अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है।
