अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में अत्याधुनिक गैस्ट्रो केयर सुविधाएं शुरू, अब शहर में मिलेगा महानगरों जैसा उपचार

बिलासपुर। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में अत्याधुनिक गैस्ट्रो केयर सुविधाओं का विस्तार किया गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अब मरीजों को महानगरों जैसी उन्नत गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सेवाएं बिलासपुर में ही उपलब्ध होंगी।

अस्पताल में अनुभवी गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, जीआई सर्जन, एंडोस्कोपी विशेषज्ञ, लिवर एवं पैंक्रियास रोग विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षित तकनीकी और नर्सिंग टीम मरीजों को आधुनिक उपचार प्रदान कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक वर्तमान में गैस, एसिडिटी, कब्ज, फैटी लिवर, अल्सर, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस), निगलने में कठिनाई, पेट दर्द तथा लिवर और अग्नाशय संबंधी बीमारियां युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही हैं।

संस्था प्रमुख अभय कुमार गुप्ता ने बताया कि अस्पताल का उद्देश्य बिलासपुर और आसपास के लोगों को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। इसी दिशा में अस्पताल में कई आधुनिक जांच और उपचार सुविधाएं शुरू की जा रही हैं।

इनमें एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस), एसोफेजियल मैनोमेट्री, कैप्सूल एंडोस्कोपी, एडवांस्ड डायग्नोस्टिक एवं थैरेप्यूटिक एंडोस्कोपी और जीआई सर्जरी जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। अस्पताल में मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में डीआरएनबी प्रोग्राम भी शुरू किया जाएगा, जिससे यह संस्थान भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करने वाला प्रशिक्षण केंद्र भी बनेगा।

वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि अपोलो हॉस्पिटल की शुरुआत के समय कोलकाता से बिलासपुर के बीच गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, लेकिन आज अस्पताल में संपूर्ण गैस्ट्रोएंटरोलॉजी केयर टीम कार्यरत है। उन्होंने बताया कि विभाग में अब तक लगभग 1.22 लाख ओपीडी मरीजों का उपचार, 24 हजार इनडोर मरीजों की देखभाल और करीब 61 हजार गैस्ट्रो प्रक्रियाएं की जा चुकी हैं।

डॉ. सीतेंदू पटेल ने बताया कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड तकनीक भोजन नली, पेट, अग्नाशय और पित्ताशय की सूक्ष्म जांच में बेहद उपयोगी है और इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है।

वहीं डॉ. आकाश गर्ग ने कहा कि एसोफेजियल मैनोमेट्री जांच निगलने में कठिनाई, सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं के निदान में मददगार है। डॉ. समर्थ शर्मा ने बताया कि कैप्सूल एंडोस्कोपी एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें मरीज छोटे कैमरे वाले कैप्सूल को निगलता है और उससे छोटी आंत की अंदरूनी तस्वीरें प्राप्त की जाती हैं।

जीआई सर्जन डॉ. लाजपत अग्रवाल ने कहा कि नई आधुनिक मशीनों के शामिल होने से बीमारी की सटीक पहचान और जटिल सर्जरी में विशेष सहायता मिलेगी। अस्पताल में एंडोस्कोपिक उपचार, जीआई सर्जरी, लिवर एवं पैंक्रियास रोगों का उन्नत इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने लोगों से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय पर भोजन करने की आदत अपनाने की अपील की है। साथ ही लंबे समय तक पेट दर्द, एसिडिटी, वजन घटना, भूख कम लगना या पाचन संबंधी समस्या बने रहने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी है।

कार्यक्रम के अंत में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!