
यूनुस मेमन

धार्मिक नगरी रतनपुर में शनिवार को वट सावित्री व्रत पूजा श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। नगर की सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार से सुसज्जित होकर बरगद के वृक्ष के नीचे एकत्रित हुईं और अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुख-समृद्धि की कामना करते हुए विधि-विधान से वट सावित्री व्रत की पूजा-अर्चना की।
हिंदू धर्म में वर्षभर मनाए जाने वाले विभिन्न पर्व एवं त्योहार रिश्तों को मजबूती प्रदान करने के साथ सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं। भाई-बहन, पति-पत्नी और माता-पुत्र के संबंधों को समर्पित रक्षाबंधन, हरछठ, करवा चौथ एवं तीज जैसे पर्वों की तरह जेठ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत भी अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष का विशेष महत्व है। इसे आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो वातावरण में शुद्धता एवं शीतलता प्रदान करता है। इसी आस्था के साथ महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे यमराज, सावित्री एवं सत्यवान की प्रतिमा स्थापित कर जल, फूल, अक्षत, मौली धागा, रक्षा सूत्र, भीगे हुए चने तथा धूप-दीप अर्पित कर पूजा संपन्न की।
पूजन के दौरान महिलाओं ने वटवृक्ष में मौली धागा लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा की तथा अपने पति के अटल, अजर-अमर एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। इसके पश्चात सभी महिलाओं ने हाथ में भीगे हुए चने लेकर सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण किया। धार्मिक वातावरण एवं भक्तिमय आयोजन से संपूर्ण नगर आध्यात्मिकता से सराबोर नजर आया।
