

17 मई से पुरुषोत्तम अधिक मास (अधिमास) का आरंभ होने जा रहा है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस अधिकमास को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह विशेष मास 15 जून तक चलेगा, जिसके दौरान विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इसके चलते अब 36 दिनों तक शहनाइयां नहीं बजेंगी और अगले विवाह मुहूर्त सीधे 19 जून से प्रारंभ होंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष अधिकमास के कारण सभी प्रमुख पर्व-त्योहार भी पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 दिन बाद आएंगे। बताया जा रहा है कि वर्ष 1988 से 2026 के बीच यह पांचवीं बार ज्येष्ठ अधिमास पड़ रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 17 मई को कृतिका नक्षत्र एवं वृषभ राशि के चंद्रमा में पुरुषोत्तम मास का शुभारंभ होगा। इसी दिन शनि ग्रह रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश करेंगे। 18 मई को सर्वार्थ सिद्धि योग तथा 19 मई को बुध का रोहिणी नक्षत्र और शुक्र का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश विशेष शुभ संयोग बनाएंगे।
अधिकमास के दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत और धार्मिक आयोजन भी होंगे। 27 मई को पुरुषोत्तम एकादशी सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ेगी, जबकि 28 मई को प्रदोष व्रत रहेगा। जून माह में 11 जून को कमला एकादशी, 12 जून को प्रदोष व्रत और 15 June को सोमवती अमावस्या के साथ पुरुषोत्तम मास का समापन होगा।

पंडितों के अनुसार इस वर्ष मई से दिसंबर तक तीन चरणों में विवाह मुहूर्त प्रभावित रहेंगे। पहले अधिकमास, फिर गुरु तारा अस्त और उसके बाद देवशयनी एकादशी एवं चातुर्मास के कारण लंबे समय तक विवाह नहीं हो सकेंगे। मई माह में केवल 14 मई को विवाह का शुभ मुहूर्त उपलब्ध है। इसके बाद 19 जून से पुनः विवाह मुहूर्त शुरू होंगे।
अधिकमास के दौरान शहर के विभिन्न मंदिरों में धार्मिक कथाओं और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। व्यंकटेश मंदिर, हरदेवलाल मंदिर, श्रीराम मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों में कथा एवं पूजा-पाठ होंगे।
इस वर्ष प्रमुख पर्वों की तिथियां
रक्षाबंधन — 28 अगस्त
गणेश चतुर्थी — 14 सितंबर
दशहरा — 20 अक्टूबर
दीपावली — 8 नवंबर
आगामी विवाह मुहूर्त
मई
14
जून
19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29
जुलाई
1, 2, 6, 7, 8, 11, 12, 26, 30
नवंबर
20, 21, 22, 24, 25
दिसंबर
1, 2, 3, 4, 5, 6, 9, 10, 11, 12

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार विवाह मुहूर्त तय करने में सूर्य संक्रांति, गुरु-शुक्र तारा तथा चंद्रमा की स्थिति का विशेष महत्व होता है। इस बार पुरुषोत्तम मास, दो ज्येष्ठ मास, कर्क संक्रांति और भड़ली नवमी के कारण विवाह मुहूर्त सीमित हो गए हैं। 16 जुलाई से 8 अगस्त तक गुरु तारा अस्त रहेगा, जबकि 25 जुलाई से 20 नवंबर तक देवशयनी एकादशी और चातुर्मास के चलते विवाह नहीं होंगे।
पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य दिनेश महाराज के अनुसार भारतीय पंचांग सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होता है। अंग्रेजी कैलेंडर और चंद्र वर्ष के बीच प्रतिवर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। यही अंतर लगभग तीन वर्षों में एक अतिरिक्त माह के रूप में जुड़ जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। उन्होंने बताया कि स्थानीय समय, रेखांश, घटी, पल और विकला जैसी गणनाओं के आधार पर पंचांग में तिथियों का निर्धारण किया जाता है।
