
बिलासपुर। प्रदेश की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वालों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सिमगा से बिलासपुर तक 77.95 किलोमीटर लंबे मार्ग को सिक्सलेन एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर में विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रारंभिक सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है और अगले चार महीनों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली जाएगी।
यह परियोजना न केवल रायपुर और बिलासपुर के बीच यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि विशाखापट्टनम-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के हिस्से के रूप में छत्तीसगढ़ को बड़े औद्योगिक केंद्रों और समुद्री बंदरगाहों से बेहतर कनेक्टिविटी भी उपलब्ध कराएगी।
78 किलोमीटर का सफर होगा तेज
वर्तमान में सिमगा से बिलासपुर तक का लगभग 78 किलोमीटर लंबा सफर भारी वाहनों और ट्रैफिक दबाव के कारण 105 से 120 मिनट में पूरा होता है। एक्सेस कंट्रोल व्यवस्था लागू होने और सड़क के सिक्सलेन बनने के बाद वाहनों की औसत गति में करीब 40 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है। इसके बाद यही दूरी लगभग 75 मिनट में तय की जा सकेगी। सड़क को 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
दो चरणों में होगा निर्माण
एनएचएआई के अनुसार परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में सिमगा से सरगांव तक 42.45 किलोमीटर तथा दूसरे चरण में सरगांव से बिलासपुर तक 35.50 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा।
रायपुर से सिमगा तक पहले ही सिक्सलेन सड़क बन चुकी है, जबकि सिमगा से बिलासपुर तक वर्तमान में फोरलेन मार्ग संचालित है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस हिस्से को भी सिक्सलेन में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है।
प्रतिदिन गुजर रहे करीब 29 हजार वाहन
एनएचएआई के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 29,198 वाहन गुजरते हैं। अनुमान है कि वर्ष 2030-31 तक यह संख्या बढ़कर 40 हजार और वर्ष 2040 तक 60 हजार के करीब पहुंच सकती है। सिक्सलेन निर्माण के बाद भारी ट्रकों के लिए अलग लेन की व्यवस्था होगी, जिससे कार और बस जैसे छोटे वाहनों के लिए यात्रा अधिक सुरक्षित बनेगी।
उद्योग और व्यापार को मिलेगा लाभ
यह परियोजना आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रायगढ़, कोरबा और सीपत जैसे ऊर्जा केंद्रों से निकलने वाला कोयला और फ्लाई ऐश इसी मार्ग से दुर्ग-भिलाई के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचता है। सड़क चौड़ी होने से माल परिवहन तेज होगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।
विशाखापट्टनम पोर्ट तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से व्यापार और आयात-निर्यात गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं सिमगा और सरगांव क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस और नई आवासीय कॉलोनियों के विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
चार माह में तैयार होगी डीपीआर
एनएचएआई बिलासपुर के परियोजना निदेशक मुकेश कुमार परगनिहा ने बताया कि सिमगा से बिलासपुर तक सिक्सलेन परियोजना के लिए सर्वे कार्य पूरा किया जा चुका है और डीपीआर तैयार करने का काम जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले चार माह में रिपोर्ट तैयार कर ली
