बाघों के बाद अब एटीआर के 23 गांवों में कुत्तों की निगरानी, सीडीवी संक्रमण रोकने अलर्ट, 20 आवारा कुत्तों को जंगल क्षेत्र से हटाया गया, पालतू कुत्तों के वैक्सीनेशन की तैयारी


बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के बाद अब वन विभाग ने कुत्तों की निगरानी बढ़ा दी है। विभाग को आशंका है कि केनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) पालतू और आवारा कुत्तों के जरिए जंगल तक पहुंच सकता है, जिससे बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्यजीव प्रभावित हो सकते हैं। इसी को देखते हुए एटीआर के कोर और बफर जोन के 23 गांवों में विशेष सर्वे शुरू किया गया है।
वन विभाग की टीम गांव-गांव जाकर पालतू और आवारा कुत्तों की अलग-अलग जानकारी जुटा रही है। साथ ही ग्रामीणों को मुनादी कर यह समझाइश दी जा रही है कि वे अपने पालतू कुत्तों को बांधकर रखें, उनके गले में पट्टा लगाएं और उन्हें जंगल की ओर न जाने दें। विभाग पालतू कुत्तों के वैक्सीनेशन की तैयारी भी कर रहा है।
अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने कोर जोन के 19 और बफर जोन के चार गांवों में मैदानी अमला तैनात किया है। विभाग का फोकस विशेष रूप से उन कुत्तों पर है जो झुंड बनाकर जंगलों में घूमते हैं और वन्यजीवों के संपर्क में आते हैं।
वन विभाग के अनुसार अचानकमार गांव से अब तक 20 आवारा कुत्तों को पकड़कर पाली और आसपास के खुले क्षेत्रों में छोड़ा जा चुका है। यह अभियान पिछले कई महीनों से चल रहा है। जिन गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या अधिक है, वहां उनकी अलग सूची तैयार की जा रही है।
वन अमले ने बताया कि पानी की तलाश में गांव की ओर आने वाले चीतल और अन्य वन्यजीवों पर कुत्ते हमला कर देते हैं। कई बार कुत्ते बाघ और तेंदुए के शिकार तक पहुंच जाते हैं। आशंका है कि इसी संपर्क के जरिए वायरस बड़े वन्यजीवों तक फैल सकता है।
कोर जोन में अचानकमार, सारसडोल, बिंदावल, छपरवा, लमनी, कटामी, महामाई और बिरारपानी समेत 19 गांव शामिल हैं। वहीं बफर जोन के सिवलखाल, जमुनाही, जकदा और मंजूरहा गांवों में भी सर्वे कराया जा रहा है। वन विभाग का कहना है कि संक्रमण की आशंका को देखते हुए एहतियाती कदम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं।

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