
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की सेंट्रल लैब में आधुनिक तकनीक के जुड़ने से जांच व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। नई मशीनों की स्थापना के बाद लैब की जांच क्षमता में करीब 60 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जिससे मरीजों को तेज और सुलभ सेवाएं मिल रही हैं।
पहले जहां प्रतिदिन 2200 से 2300 जांचें होती थीं, अब यह संख्या बढ़कर 3500 से 3700 तक पहुंच गई है। इसके साथ ही रिपोर्ट मिलने का समय भी काफी घटा है। सामान्य जांच, जिनमें पहले 24 से 48 घंटे लगते थे, अब 6 से 12 घंटे में उपलब्ध हो रही हैं, जबकि अधिकांश विशेष जांच 24 घंटे के भीतर मिल रही हैं। पूर्व में कई उन्नत जांचें बाहर भेजनी पड़ती थीं, जिससे 3 से 5 दिन तक का समय लगता था।
सिकल सेल जांच अब यहीं संभव
लैब में अब बायोकेमिस्ट्री से जुड़े रूटीन टेस्ट—जैसे शुगर, लिवर और किडनी प्रोफाइल, थायरॉयड सहित हार्मोनल जांच, इलेक्ट्रोलाइट और एंजाइम से संबंधित एडवांस टेस्ट—सभी यहीं किए जा रहे हैं। विशेष रूप से सिकल सेल स्क्रीनिंग और कन्फर्मेटरी जांच की सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
पहले प्रतिदिन 20 से 30 सिकल सेल जांच होती थीं, जो अब बढ़कर 80 से 100 से अधिक हो गई हैं। इनमें 40 से ज्यादा मरीज नियमित फॉलोअप के हैं, जिससे उपचार की निरंतरता बेहतर हुई है।
ओपीडी-आईपीडी मरीजों को सीधा लाभ
सिम्स में रोजाना 1500 से 2000 ओपीडी और 400 से 600 आईपीडी मरीज आते हैं। इनमें से लगभग 60 से 70 प्रतिशत मरीजों को लैब जांच की आवश्यकता होती है। बढ़ी हुई क्षमता के चलते इन मरीजों को अब समय पर रिपोर्ट मिल रही है, जिससे इलाज की प्रक्रिया भी तेज हुई है।
24×7 सेवा और डिजिटल सुविधा
लैब को 24×7 संचालित किया जा रहा है। इसके लिए अतिरिक्त टेक्नीशियन नियुक्त किए गए हैं और शिफ्ट सिस्टम लागू किया गया है। साथ ही 2-3 अत्याधुनिक ऑटोएनालाइजर और विशेष जांच मशीनें स्थापित की गई हैं।
डिजिटल सुविधाओं के तहत 2025-26 में क्यूआर बारकोड सिस्टम लागू किया गया है। वर्तमान में 70 से 80 प्रतिशत रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीज घर बैठे मोबाइल पर अपनी रिपोर्ट देख पा रहे हैं। इससे लैब काउंटर पर भीड़ में भी कमी आई है।
नई व्यवस्था के बाद सिम्स की सेंट्रल लैब क्षेत्र के मरीजों के लिए तेज, सटीक और सुलभ जांच सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरी है।
