

बिलासपुर। शहर की ऐतिहासिक पहचान मानी जाने वाली पुरानी कलेक्टोरेट बिल्डिंग को संरक्षित रखते हुए उसका कायाकल्प किया जाएगा। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ भवन का निरीक्षण कर स्पष्ट किया कि इमारत में किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी, बल्कि इसके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जर्जर हो चुकी नकल शाखा और रिकॉर्ड रूम की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने दस्तावेजों के संरक्षण के लिए रिकॉर्ड रूम की ऊंचाई बढ़ाई जाए और आधुनिक रैक सिस्टम लगाया जाए, ताकि अभिलेख सुरक्षित और व्यवस्थित रखे जा सकें।

इसके साथ ही भवन के मूल स्थापत्य को ध्यान में रखते हुए रोशनी और वेंटिलेशन की बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को गोथिक शैली के अनुरूप वैज्ञानिक तरीके से रोशनदान तैयार करने को कहा गया, जिससे भवन की ऐतिहासिक विशेषता बनी रहे और उपयोगिता भी बढ़े।
गोथिक स्थापत्य शैली की शुरुआत 12वीं शताब्दी में फ्रांस में हुई थी। इस शैली की प्रमुख विशेषताओं में नुकीले मेहराब, बाहरी दीवारों को सहारा देने वाले ऊंचे संरचनात्मक स्तंभ, रंगीन कांच की बड़ी खिड़कियां और छत के अंदर पत्थर की पसलियों जैसा मजबूत ढांचा शामिल है। भारत में छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और बॉम्बे हाई कोर्ट जैसी ऐतिहासिक इमारतें इसी शैली का प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रशासन के इस निर्णय को शहर की विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रहेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इसकी वास्तुकला से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
