

बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ की पहली और एकमात्र रामसर साइट कोपरा जलाशय के समीप प्रस्तावित स्टील प्लांट परियोजना को लेकर उठे विवाद के बीच अंततः कंपनी ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। सकरी तहसील के ग्राम सकर्रा में प्रस्तावित आईमैक स्टील एंड पॉवर लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड अथॉरिटी को पत्र लिखकर अपना आवेदन वापस ले लिया है। साथ ही वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के ‘परिवेश’ पोर्टल पर प्रस्तुत प्रस्ताव भी निरस्त कर दिया गया है।

ईआईए रिपोर्ट में तथ्य छिपाने का आरोप
यह परियोजना कोपरा जलाशय से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित की जानी थी। कंपनी द्वारा प्रस्तुत इनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट (ईआईए) रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि प्रस्तावित क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में वन्यजीवों का कोई प्रवासी मार्ग नहीं है। साथ ही कोपरा जलाशय को केवल एक सामान्य जल स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि उसका रामसर साइट के रूप में अंतरराष्ट्रीय महत्व छिपाया गया।
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने इस रिपोर्ट को भ्रामक बताते हुए गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।


अंतरराष्ट्रीय महत्व का पारिस्थितिक क्षेत्र
कोपरा जलाशय सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां 161 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। इनमें 58 देशी-विदेशी प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं, जबकि पांच प्रजातियां अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में आती हैं।
यह जलाशय बार-हेडेड गूज, पिनटेल, ब्लैक स्टॉर्क, स्पूनबिल और रेड-क्रैस्टेड पोचार्ड जैसे पक्षियों का प्रमुख आवास है। कुछ प्रजातियों की वैश्विक आबादी का एक प्रतिशत से अधिक हिस्सा यहां पाया जाता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास बनाता है।
वेटलैंड अथॉरिटी ने मांगी थी रिपोर्ट
मामले में तथ्य छिपाने और प्रक्रियागत अनियमितताओं के आरोपों के बाद छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड अथॉरिटी ने बिलासपुर कलेक्टर से तकनीकी जांच और विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इसके साथ ही रायपुर के एक सरकारी विज्ञान कॉलेज के सहायक प्राध्यापक पर निजी कंपनी के लिए लॉबिंग करने के आरोप भी सामने आए थे, जिसने विवाद को और गंभीर बना दिया।
नागरिकों और विशेषज्ञों ने उठाई आवाज
पर्यावरण संरक्षण को लेकर नागरिकों और विशेषज्ञों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। रायपुर के अधिवक्ता संदीप तिवारी और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सत्य प्रकाश पांडेय ने वेटलैंड अथॉरिटी को पत्र लिखकर इस परियोजना का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि संरक्षित पक्षी आवास के निकट भारी उद्योग की स्थापना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और रामसर कन्वेंशन के प्रावधानों का उल्लंघन है।
कंपनी ने स्वीकारी पर्यावरणीय संवेदनशीलता
कंपनी ने 20 अप्रैल 2026 को अपने पत्र में स्वीकार किया कि प्रस्तावित स्थल के समीप स्थित कोपरा जलाशय पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। पत्र में कहा गया है कि यहां समृद्ध जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास है।
कंपनी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए स्टील प्लांट परियोजना को स्वेच्छा से वापस लेने का निर्णय लिया।
पक्षियों के आवास को मिली सुरक्षा
इस निर्णय के बाद कोपरा जलाशय क्षेत्र में रहने वाले देशी-विदेशी पक्षियों के प्राकृतिक आवास को बड़ा संरक्षण मिला है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि यह परियोजना आगे बढ़ती, तो इससे क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था।
कोपरा जलाशय के पास प्रस्तावित स्टील प्लांट का निरस्त होना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह प्रकरण न केवल प्रशासनिक सतर्कता, बल्कि नागरिक सहभागिता और वैज्ञानिक हस्तक्षेप की प्रभावशीलता को भी रेखांकित करता है।
