

बिलासपुर, 18 अप्रैल 2026।
शहर में हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। एक हितग्राही ने विभागीय लापरवाही से परेशान होकर अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।
मामला अभिलाषा परिसर, तिफरा स्थित हाउसिंग बोर्ड कार्यालय का है, जहां तरुण साहू नामक युवक ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी का एक फ्लैट रिसेल में खरीदकर उसकी विधिवत रजिस्ट्री कराई थी। रजिस्ट्री के बाद उन्होंने नामांतरण (म्यूटेशन) के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज कार्यालय में जमा कर दिए थे।

7 महीने तक नहीं हुई कार्रवाई
आम तौर पर नामांतरण की प्रक्रिया 1 से 2 महीने में पूरी हो जाती है, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि उसके आवेदन पर 7 महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब वह जानकारी लेने कार्यालय पहुंचा, तो संबंधित अधिकारी पूनम बंजारे ने बताया कि नामांतरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन संबंधित फाइल कार्यालय में नहीं मिल रही है।
50 से अधिक बार लगाए दफ्तर के चक्कर
तरुण साहू का कहना है कि वह पिछले कई महीनों में 50 से अधिक बार कार्यालय के चक्कर लगा चुका है। हर बार उसे यही जवाब दिया जाता है कि फाइल खो गई है या उसकी तलाश की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में उसका समय और आर्थिक नुकसान दोनों हुआ है।
‘बादाम’ देकर जताया विरोध
लगातार टालमटोल और लापरवाही से परेशान होकर युवक ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। वह 500 ग्राम बादाम लेकर कार्यालय पहुंचा और संबंधित अधिकारी को देते हुए कहा कि “इसे खाने से याददाश्त तेज होगी, शायद तब मेरी फाइल मिल जाए।”
यह घटना न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों को भी उजागर करती है।
प्रशासन पर उठे सवाल
मामले के सामने आने के बाद हाउसिंग बोर्ड की कार्यशैली और जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। लंबे समय तक फाइल का गायब रहना और शिकायत के बावजूद समाधान न होना, सिस्टम की कार्यक्षमता पर संदेह पैदा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की लापरवाही पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आम नागरिकों का सरकारी संस्थानों से विश्वास उठ सकता है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पीड़ित ने न्याय की मांग करते हुए शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
