

बिलासपुर। शहर में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने की व्यवस्था लागू हुए करीब 8 साल बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक है। नगर निगम द्वारा घर-घर हरा और नीला डस्टबिन वितरित करने के बावजूद 90 से 95 प्रतिशत लोग आज भी कचरा अलग करने की आदत नहीं अपना पाए हैं। ऐसे में अब केंद्र सरकार द्वारा कचरे को चार श्रेणियों में बांटने के नए नियम ने निगम और नागरिकों—दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

अब चार तरह से करना होगा कचरा अलग
केंद्र सरकार के नए निर्देशों के अनुसार अब हर घर में चार अलग-अलग डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा:
हरा: गीला कचरा
नीला: सूखा कचरा
लाल: घरेलू खतरनाक कचरा (बैटरी, बल्ब, ई-वेस्ट आदि)
पीला: सैनिटरी वेस्ट (डायपर, सेनेटरी पैड आदि)
इसका उद्देश्य कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है।

8 साल में भी नहीं बदली आदत
नगर निगम ने वर्षों पहले गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन और डोर-टू-डोर कलेक्शन व्यवस्था लागू की थी। कचरा गाड़ियों में भी दो अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश घरों में कचरा अलग नहीं किया जा रहा। नतीजतन, कलेक्शन के समय ही गीला और सूखा कचरा आपस में मिल जाता है और पूरी व्यवस्था निष्प्रभावी हो जाती है।
निगम की तैयारी भी अधूरी
सिर्फ नागरिकों की लापरवाही ही नहीं, बल्कि नगर निगम की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। वर्तमान में कचरा कलेक्शन गाड़ियों में केवल दो ही कंपार्टमेंट हैं, जबकि नए नियम के तहत चार श्रेणियों के लिए अलग व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए गाड़ियों में बदलाव, नई प्रोसेसिंग यूनिट, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम की जरूरत होगी।
70 वार्ड, 158 टिपर से कलेक्शन
शहर के 70 वार्डों में फिलहाल 158 टाटा टिपर के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा है। अभी इन गाड़ियों में हरा और नीला दो पार्टिशन हैं, जिन्हें बढ़ाकर चार किया जाएगा और लाल व पीले रंग के कंपार्टमेंट भी जोड़े जाएंगे।

सबसे बड़ी चुनौती: जागरूकता
विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती लोगों की आदत बदलना है। नियम बनाना आसान है, लेकिन उसे व्यवहार में लाना मुश्किल होता है। इसके लिए लगातार जनजागरूकता अभियान, सख्ती और निगरानी जरूरी होगी।
नगर निगम के अपर आयुक्त खजांची कुम्हार ने बताया कि नए नियम का उद्देश्य कचरे की प्रोसेसिंग को आसान बनाना और पर्यावरण को नुकसान से बचाना है। इसके लिए कलेक्शन सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा।
सिस्टम फेल होने का खतरा
यदि समय रहते नागरिकों की आदत नहीं बदली गई और निगम ने अपनी व्यवस्थाएं मजबूत नहीं कीं, तो आशंका है कि नया चार श्रेणी वाला सिस्टम भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगा, जैसा कि गीला-सूखा कचरा अलग करने का नियम अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।
शहर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए अब नागरिकों और प्रशासन दोनों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी, तभी यह नई व्यवस्था सफल हो सकेगी।
