

बिलासपुर। शहर में जनस्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद नगर निगम ने गुरुवार को कड़ी कार्रवाई करते हुए तोरवा पावर हाउस चौक के पास संचालित शकुंतला बर्फ फैक्ट्री को सील कर दिया। जांच में खुलासा हुआ कि फैक्ट्री से मछलियों को संरक्षित रखने के लिए तैयार की जाने वाली नॉन-एडिबल (अखाद्य) बर्फ को गन्ना रस, जूस और आइसक्रीम दुकानों में सप्लाई किया जा रहा था।
नगर निगम के जोन क्रमांक 6 की टीम ने पहले ही फैक्ट्री संचालक वीरेंद्र खरे को नोटिस जारी कर लाइसेंस, पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट, निर्माण प्रक्रिया सहित अन्य जरूरी दस्तावेज तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। तय समय सीमा बीतने के बाद भी संचालक द्वारा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद निगम और संबंधित विभागों ने संयुक्त जांच की।
जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। पता चला कि फैक्ट्री का खाद्य एवं औषधि प्रशासन में वैध पंजीयन तक नहीं है और बिना किसी अनुमति के बर्फ का उत्पादन एवं सप्लाई की जा रही थी। विभाग ने पहले ही निर्देश दिए थे कि मछलियों के लिए उपयोग होने वाली बर्फ में फूड कलर मिलाया जाए, ताकि उसे खाने योग्य बर्फ से अलग पहचाना जा सके, लेकिन इस नियम का भी पालन नहीं किया गया।
मामले को गंभीर मानते हुए नगर निगम ने फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आगे भी ऐसी जांच जारी रहेगी।
दूषित बर्फ से गंभीर बीमारियों का खतरा
सिम्स के एमएस डॉ. लखन सिंह ने बताया कि मछलियों को रखने के लिए बनने वाली बर्फ आमतौर पर अशुद्ध और बिना ट्रीटमेंट वाले पानी से तैयार होती है, जिसमें बैक्टीरिया और वायरस मौजूद हो सकते हैं। ऐसी बर्फ का उपयोग पेय पदार्थों में करने से एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, कॉलरा और पीलिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।
कार्रवाई के दौरान हुआ विवाद
फैक्ट्री सील करने पहुंची निगम टीम को कार्रवाई के दौरान विरोध और हंगामे का सामना भी करना पड़ा। बावजूद इसके टीम ने कार्रवाई पूरी की और संचालक को सभी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
