
शशि मिश्रा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति को दो दशक पहले झकझोर देने वाले बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में गुरुवार को बड़ा और निर्णायक मोड़ आ गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जेसीसीजे) के अध्यक्ष अमित जोगी को दोषी करार देते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अमित जोगी की संलिप्तता सिद्ध होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वे 21 दिनों के भीतर संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण करें।
पहले बरी, अब दोषी—लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा
यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें पहले ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई और मामला दोबारा खुला।
मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने अदालत में तर्क दिया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश के तहत कराई गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि CBI ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें पर्याप्त साक्ष्य शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फिर खुला केस
इस मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए केस को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा था। इसके बाद विस्तृत सुनवाई हुई और अब यह फैसला सामने आया है।
गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच अन्य दोषियों की अपील खारिज कर आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रख चुकी है।
21 साल पुराना सनसनीखेज मामला
4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में NCP नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने उस समय प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था।
मामले में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।

CBI जांच और साजिश के आरोप
हत्याकांड के बाद शुरुआती पुलिस जांच पर पक्षपात के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।
सतीश जग्गी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि यह हत्या तत्कालीन सरकार की प्रायोजित साजिश थी और जांच के दौरान सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
अमित जोगी का बयान
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने कहा कि उन्हें पूरा सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और यह फैसला उनके लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने इसे अपने साथ अन्याय बताया।
आगे क्या?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब अमित जोगी के पास सीमित कानूनी विकल्प बचे हैं। यदि वे सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं लेते हैं, तो उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा।
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है और अब सभी की नजरें इस मामले के अगले कानूनी कदम पर टिकी हैं।
मामले में 28 लोग पाए गए दोषी
जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।
2 सीएसपी, थाना प्रभारी समेत अन्य को हुई थी सजा
इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाने वालों में 2 तत्कालीन सीएसपी और एक तत्कालीन थाना प्रभारी के अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं।
संभवत अमित जोगी को इस फैसले का आभास हो गया था, तभी उन्होंने पिछले कुछ दिनों में राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी थी। हाल ही में उन्होंने अखिलेश यादव से मुलाकात की और उनकी खुशामद करते नजर आए। शायद समाजवादी पार्टी से गठबंधन का कोई इरादा था लेकिन इस फैसले ने उनके सभी इरादों पर पानी फेर दिया है ।
जब अजीत जोगी प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो जोगी परिवार की तूती बोलती थी और अमित जोगी किसी फिल्मों में दिखाए जाने वाले नेता के बेटे की तरह अपनी दबंगई से पूरे प्रदेश को थर्रा रहे थे। उस दौरान बच्चा बच्चा जानता था कि रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी की ही महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन राजनीतिक पहुंच के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था लेकिन कहते हैं भगवान के घर देर है अंधेर नहीं ।हाई कोर्ट के फैसले ने उसे ही सही साबित किया है।
