

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से विवाद और चिंता का विषय बने अवैध धर्मांतरण के मुद्दे ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक तापमान बढ़ा दिया है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के समर्थन में मंगलवार को बिलासपुर में सर्व हिंदू समाज के नेतृत्व में विशाल आभार रैली निकाली गई, जिसमें हजारों लोगों की भागीदारी देखने को मिली।

गांधी चौक से शाम करीब 6 बजे शुरू हुई यह रैली जूना बिलासपुर, गोल बाजार होते हुए देवकीनंदन चौक तक पहुंची। हाथों में बैनर, पोस्टर और भगवा ध्वज लिए लोगों ने पूरे रास्ते सरकार के समर्थन में नारे लगाए और विधेयक को जल्द लागू करने की मांग की। रैली में युवा, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। समापन तिलक नगर स्थित हनुमान मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और आरती के साथ हुआ।

धर्मांतरण बना बड़ा मुद्दा
प्रदेश में अवैध धर्मांतरण का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है और पिछले चुनावों में भी यह प्रमुख राजनीतिक विषय रहा। समर्थकों का आरोप है कि विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में प्रलोभन, चंगाई सभाओं और अन्य माध्यमों से धर्म परिवर्तन की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि अब यह प्रभाव शहरी क्षेत्रों तक भी फैलता नजर आ रहा है।
रैली में शामिल वक्ताओं ने कहा कि धर्मांतरण केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव वाला विषय है, जिसका असर प्रदेश की पहचान और भविष्य पर पड़ सकता है।
सरकार के कदम को बताया जरूरी

सर्व हिंदू समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से सख्त कानून की मांग कर रहे थे और सरकार द्वारा लाया गया यह विधेयक उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका तर्क है कि यह कानून किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध और दबावपूर्वक किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म बदलना है तो उसे वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, लेकिन प्रलोभन, दबाव या गलत जानकारी के आधार पर किए गए परिवर्तन पर सख्ती जरूरी है।

विरोध पर उठे सवाल
विधेयक के विरोध को लेकर भी रैली में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब कानून सभी धर्मों के लिए समान रूप से लागू है और किसी भी अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाता है, तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है।

हाल के दिनों में बिलासपुर के अंबेडकर चौक समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इस विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। रैली में शामिल लोगों का कहना है कि विरोध करने वाले समूहों को स्पष्ट करना चाहिए कि वे कानून के किस प्रावधान से असहमत हैं।
आरक्षण और डीलिस्टिंग की भी उठी मांग
रैली के दौरान कुछ वक्ताओं ने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण लाभ लेने के मुद्दे को भी उठाया। उनका कहना था कि इस विषय पर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। साथ ही डीलिस्टिंग की मांग भी सामने आई, ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

प्रदेशभर में जांच और सख्ती की मांग
समर्थकों ने सरकार से मांग की कि विधेयक को जल्द लागू कर पूरे प्रदेश में सख्ती से पालन कराया जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि सामाजिक संतुलन भी मजबूत होगा।
राजनीतिक और सामाजिक असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि धर्मांतरण का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से प्रभावी रहा है और यह विधेयक आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, एक ओर जहां सरकार इसे आवश्यक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विरोध और समर्थन के बीच यह मुद्दा और ज्यादा केंद्र में आ गया है।

छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है ,जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने काफी विचार मंथन के बाद धर्म स्वातंत्रय विधेयक 2026 लाया है। लेकिन विदेशी फंडिंग से पोषित कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें व्यक्तिगत क्षति हो रही है। यह विरोध सरकार को बैक फुट में ला सकता है, शायद इसीलिए इस विधेयक का समर्थन भी इतना ही आवश्यक है। इस दृष्टिकोण से मंगलवार को बिलासपुर में निकली आभार रैली निश्चित रूप से सरकार का मनोबल बढ़ाएगी, साथ ही धर्मांतरण में लिप्त लोगों को भी यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि एक बड़ा वर्ग जाग चुका है और अब उनकी अवैध गतिविधियां आसानी से संचालित नहीं हो पाएगी। ऊपर से सख्त कानून का शिकंजा भी उनके लिए तैयार है।

बेकिंग न्यूज़
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया
ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित धर्म स्वातंत्र्य कानून का समर्थन किया है
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