
बिलासपुर। शहर में आग की लगातार घटनाओं के बावजूद अवैध निर्माण और ज्वलनशील सामान के भंडारण पर नगर निगम की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। गजमोहिनी परिसर और जवाली नाले के पास स्थित मोहन परिसर में लगी आग की जांच में निगम ने अवैध निर्माण और पार्किंग में बनाए गए गोदाम को जिम्मेदार माना है, लेकिन अब तक सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार 1 मार्च की सुबह करीब 7 बजे गजमोहिनी परिसर की पार्किंग में आग लग गई थी। सूचना मिलने पर निगम की टीम मौके पर पहुंची और जांच में पाया कि परिसर के स्वामी अरुण अग्रवाल ने बिना अनुमति पार्किंग के कॉलम के चारों ओर ईंट की दीवार बनाकर उसे घेर लिया था और वहां इलेक्ट्रॉनिक ज्वलनशील सामान का भंडारण किया जा रहा था। चार मंजिला आवासीय इमारत में आग लगने के बाद धुआं पूरी बिल्डिंग में भर गया और रहवासियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर सभी लोगों को तत्काल बाहर निकाला गया।
निगम की जांच रिपोर्ट में इस घटना को मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। इसके बावजूद निगम ने सख्त कार्रवाई करने के बजाय भवन मालिक को दूसरा नोटिस जारी कर अवैध निर्माण और पार्किंग में बने गोदाम को हटाने के लिए 15 दिन का समय दे दिया है।
मोहन परिसर में भी सालभर पहले हुई थी ऐसी ही घटना
गजमोहिनी परिसर की तरह ही जवाली नाले के पास स्थित मोहन परिसर में भी करीब एक साल पहले बेसमेंट पार्किंग को अवैध रूप से गोदाम में बदल दिया गया था। वहां भी इलेक्ट्रॉनिक सामान का भंडारण किया जा रहा था और आग लगने के बाद जांच में पार्किंग के दुरुपयोग को ही मुख्य कारण माना गया था। इसके बावजूद अब तक वहां स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
भवन अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि गजमोहिनी परिसर के मालिक को दूसरा नोटिस जारी किया गया है और पार्किंग में बने अवैध गोदाम को हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पार्किंग में बनाया गया गोदाम ही आग का प्रमुख कारण रहा है।
रिहायशी इलाका बना थोक बाजार
पुराने बस स्टैंड के पास स्थित कश्यप कॉलोनी, जो पहले शांत आवासीय क्षेत्र थी, अब धीरे-धीरे थोक कपड़ा बाजार में बदलती जा रही है। यहां 30 से अधिक दुकानें, गोदाम और कॉम्प्लेक्स संचालित हो रहे हैं, जबकि इनका नक्शा आवासीय उपयोग के आधार पर स्वीकृत किया गया था।
नगर निगम के भवन अनुज्ञा विभाग और टीएंडसीपी के सामने यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ वर्ष पहले एक बड़े गोदाम में आग लगने के बाद भी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। अब भी इलाके में अवैध निर्माण और ज्वलनशील सामान का भंडारण जारी है, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।
