
प्रवीर भट्टाचार्य

बिलासपुर। हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का आरम्भ गुरुवार को बिलासपुर में भक्ति, आस्था और उल्लास के साथ हुआ। शाम 5 बजे पुलिस मैदान से निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे शहर को भगवामय कर दिया। आकर्षक झांकियों, ऊंची प्रतिमाओं, पारंपरिक नृत्यों और भक्ति संगीत के बीच हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने।
शोभायात्रा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई, जहां 20 से अधिक पंडितों ने श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
यात्रा में सबसे आगे 17 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा रही, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी। इसके साथ ही 12 फीट ऊंचे भगवान गणेश की प्रतिमा और बनारस से लाई गई भगवान हनुमान की विशेष झांकी ने भी सभी का मन मोह लिया।
शोभायात्रा में 10 बग्घियों पर सजी जीवंत झांकियां शामिल रहीं, जिनमें धार्मिक और ऐतिहासिक प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया।
महारानी लक्ष्मीबाई और महाराणा प्रताप की घुड़सवार झांकियां विशेष आकर्षण रहीं। इसके अलावा तखतपुर का अखाड़ा, रामधुन मंडली, ढोल-बैंड, चलित ऑर्केस्ट्रा, रामपुर का कर्मा नृत्य, पंथी नृत्य और रावत नाचा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस वर्ष की खास प्रस्तुति खाटू श्याम की भव्य झांकी रही, जिसे कोलकाता से आए कारीगरों ने फूलों से सजाया था। श्रद्धालु हाथों में निशान लेकर शोभायात्रा में शामिल हुए और तिलक नगर हनुमान मंदिर पहुंचकर अर्पित किए।
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों को भगवा ध्वज और आकर्षक सजावट से सजाया गया था। विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संघों और डॉक्टरों ने जगह-जगह मंच बनाकर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई और जगह-जगह जलपान की व्यवस्था भी की गई।
करीब 150 वालंटियर वॉकी-टॉकी के माध्यम से पूरी व्यवस्था संभालते नजर आए, जिससे शोभायात्रा सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ती रही। शोभायात्रा पुलिस मैदान से शुरू होकर सत्यम चौक, अग्रसेन चौक, सीएमडी चौक, इंदिरा गांधी चौक, शिव टॉकीज चौक, गांधी चौक, जूना बिलासपुर, गोलबाजार, सदर बाजार और देवकी नंदन चौक होते हुए तिलक नगर हनुमान मंदिर पहुंची।
तिलक नगर हनुमान मंदिर में महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जहां श्रद्धालुओं के बीच 21 क्विंटल प्रसाद वितरित किया गया। पूरे शहर में घर-घर भगवा ध्वज लहराते नजर आए और लोगों ने दीप जलाकर नववर्ष का स्वागत किया।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह संवत्सर ‘रौद्र’ नाम से जाना जाएगा, जिसमें बृहस्पति राजा और मंगल मंत्री के रूप में वर्ष का संचालन करेंगे। इसे धर्म, शिक्षा और सकारात्मक ऊर्जा के लिए शुभ माना जा रहा है।
इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि शहरवासियों को एक सूत्र में बांधते हुए सांस्कृतिक एकता और उत्साह का अद्भुत संदेश भी दिया।
