

बिलासपुर। शहर के सामुदायिक भवनों को लेकर लंबे समय से चल रही अव्यवस्था को खत्म करने के लिए बिलासपुर नगर निगम ने नई नीति लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। निगम सीमा में मौजूद करीब 180 सामुदायिक और सामाजिक भवनों पर अब तक पार्षदों और उनसे जुड़ी कमेटियों का अनौपचारिक नियंत्रण रहा है। इन भवनों से होने वाली आय का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड निगम के पास नहीं है, जबकि बिजली बिल और मरम्मत का खर्च लगातार निगम के खाते से जाता रहा है।
निगम की समीक्षा में यह स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए मेयर‑इन‑काउंसिल की बैठक में नई नियमावली को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सामुदायिक भवनों का संचालन अब पार्षदों या उनकी कमेटियों के बजाय पंजीकृत संस्थाओं और स्व-सहायता समूहों को सौंपा जाएगा।

70 वार्डों में पार्षदों का नियंत्रण
निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के 70 वार्डों में कई सामुदायिक भवनों का संचालन सीधे पार्षद या उनसे जुड़ी समितियां कर रही थीं। इन भवनों में कार्यक्रमों की बुकिंग से होने वाली आय स्थानीय स्तर पर ही रखी जाती रही, जबकि बिजली बिल और रखरखाव की जिम्मेदारी निगम उठाता रहा। इस व्यवस्था के कारण एक तरफ निगम का खर्च बढ़ा, वहीं कई भवन देखरेख के अभाव में जर्जर होते गए।
पंजीकृत संस्थाओं को दिया जाएगा संचालन
नई व्यवस्था के तहत सामुदायिक भवनों का संचालन केवल उन्हीं संस्थाओं को दिया जाएगा जो सोसाइटी एक्ट या एनयूएलएम (NULM) के तहत पंजीकृत होंगी। चयनित संस्थाओं को भवन का संचालन और रखरखाव दोनों की जिम्मेदारी निभानी होगी।
नई पॉलिसी की प्रमुख शर्तें
सोसाइटी एक्ट या राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन में पंजीकृत संस्था ही पात्र होगी
आवेदन के साथ 10 हजार रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा
शुरुआत में 3 साल का आवंटन, संतोषजनक कार्य पर 2 साल का विस्तार
आय-व्यय का वार्षिक ऑडिट अनिवार्य
सरकारी कार्यक्रमों के लिए भवन निशुल्क उपलब्ध कराना होगा
इस संबंध में मेयर पूजा विधानी ने कहा कि सामुदायिक भवनों को संस्थाओं को देने की तैयारी की जा रही है। संस्थाएं ही संचालन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संभालेंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भवनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
कई भवन जर्जर हालत में
शहर के कई सामुदायिक भवन खराब स्थिति में पहुंच चुके हैं। उदाहरण के तौर पर पत्रकार कॉलोनी का सामुदायिक भवन लंबे समय से बंद पड़ा है। वहीं विभिन्न वार्डों में स्थित गोवर्धन लाल-मनसुख लाल सामुदायिक भवन, जवाली नाला क्षेत्र का भवन, अटल सामुदायिक भवन सहित अन्य भवनों की हालत भी खराब बताई जा रही है।
पार्षदों ने दी सफाई
कई पार्षदों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है।
वार्ड 30 के सभापति विनोद सोनी का कहना है कि वे गरीबों को सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भवन मुफ्त उपलब्ध कराते हैं, लेकिन भवन जर्जर होने के कारण फिलहाल बुकिंग बंद है।
वार्ड 18 की पार्षद अंजनी कश्यप ने बताया कि भवन की मरम्मत चल रही है, इसलिए बुकिंग नहीं ली जा रही।
वार्ड 19 के नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप ने कहा कि यदि भवनों का टेंडर किया गया तो इसका विरोध होगा, क्योंकि ये गरीबों के लिए बनाए गए हैं।
वार्ड 37 की पार्षद लक्ष्मी कृष्णा रजक ने कब्जे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भवन की मरम्मत के कारण फिलहाल बुकिंग नहीं हो रही है।
वार्ड 5 की पार्षद गायत्री लक्ष्मी साहू का कहना है कि जरूरतमंदों को मुफ्त में भवन देने की व्यवस्था नई पॉलिसी में भी होनी चाहिए।

छठ घाट का सामुदायिक भवन भी विवादों में
इसी तरह छठ घाट में बना सामुदायिक भवन भी लंबे समय से विवादों में है। इस भवन का संचालन पाटलिपुत्र सांस्कृतिक विकास मंच द्वारा किया जा रहा है। भवन जर्जर हो चुका है और उसके आय-व्यय का कोई स्पष्ट ब्यौरा उपलब्ध नहीं है। विवाद के कारण न तो नगर निगम इसकी मरम्मत करा पा रहा है और न ही संस्था इस दिशा में कोई पहल कर रही है। कई बार भवन का संचालन निगम को सौंपने की बात उठी, लेकिन विरोध के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इस पॉलिसी के लागू हो जाने से उम्मीद की जा सकती है कि इसका संचालन अब मंच को मिलेगा और जर्जर भवन की हालत सुधर पाएगी।
निगम की नई नीति लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि शहर के सामुदायिक भवनों का पारदर्शी और व्यवस्थित संचालन हो सकेगा तथा आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
