

गुरु विहार कॉलोनी सरकंडा में 11 तारीख बुधवार को हिंदू सम्मेलन अध्यात्म संगोष्ठी एवं भक्तिमय भजन संध्या का आयोजन किया गया । गुरु विहार परिवार के सभी सदस्यों के सहयोग से यह आयोजन संपन्न किया गया । कार्यक्रम के संयोजक पं. अनिल शर्मा जी सेवानिवृत्त डिप्टी डायरेक्टर रेशम विभाग छत्तीसगढ़,पं.बाबूलाल पंड्या जी सेवानिवृत्त सुपरीटेंडेंट गुरु घसीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर, एवं पं. प्रमोद शर्मा जी सेवानिवृत्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी छत्तीसगढ़ शासन के दिशा निर्देशन में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता परम पूज्य दुर्गेश जी महाराज राष्ट्रीय धर्माचार्य, आशीर्वचन मुख्य अतिथि स्वामी सेवाव्रतानन्द जी महाराज सचिव रामकृष्ण मिशन बिलासपुर, अति विशिष्ट अतिथि डॉ ररमणेश मूर्ति जी अधिष्ठाता सिम्स छत्तीसगढ़, विशिष्ट अतिथि डाॅ प्रताप पांडेय जी प्राचार्य डी एल एस कॉलेज बिलासपुर थे। डॉ प्रताप पांडेय जी ने हिंदू धर्म पर प्रकाश डालते हुए गंगा गायत्री गीता और गौ के महत्व को बताते हुए हिंदू संस्कृति के इतिहास पर प्रकाश डाला एवं युवा वह है जो जीवटता से राष्ट्र सृजन और परिवर्तन की सोच रखता है ।हमारा उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का होना चाहिए ।
डॉ रमणेश मूर्ति जी ने अपने वक्तव्य में धर्म एक कर्तव्य पथ है सेवा साधना त्याग हमारा परम धर्म है। संस्कृति या संस्कार एक धरोहर है और यह धरोहर एक विरासत के रूप में हमें हमारे पूर्वजों से जोड़ती है। जिसे हम एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित करते हैं। धर्म संस्कृति को दिशा देता है और संस्कृति धर्म का पोषण करती है ।डॉ मूर्ति ने सामाजिक चेतना ,सामाजिक समरसता, धर्म और विज्ञान ,चरक, सुसृत, धनवंतरी के द्वारा जीवन शैली के बारे में जानकारी दी ।हमारे युवाओं से आवाहन किया कि पहले एक अच्छा सुसंस्कृत इंसान बनना है और समाज राष्ट्र निर्माण की ओर अग्रसर होना है ।

स्वामी ससेवाव्रतानंद जी के द्वारा हिंदू धर्म सनातन धर्म है और हमें यदि भारत को एकजुट करना है तो धर्म के साथ चलना होगा धर्म हमारा मेरुदंड है ।स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को बताते हुए उन्होंने यह कहा कि हमें पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित नहीं होना है। भागवत रामायण की कथाएं अपने बच्चों को सुनाना चाहिए क्योंकि रामायण भागवत गीता में हमें मनुष्य निर्माण की कथाएं मिलती है ।धर्म से हमें नैतिक बल मिलता है यदि हम धर्म को भूल जाते हैं तो हमारे आगे की तीन पीढ़ी नष्ट हो जाती है। धर्म के साथ चले और देश सेवा करते रहें। परम पूज्य दुर्गेश जी महाराज कहते हैं सनातन संस्कृति सनातन एकता सनातन धर्म सदा से है सदा रहेगा।रामायण हमें निज धर्म पर चलना सिखाती है । धर्म का तात्पर्य होता है धारण करना अर्थात वेदांत शास्त्रों में जो बताया गया है वह धर्म है और जो नहीं बताया गया वह अधर्म है। सनातन संस्कृति का स्रोत हमारे वेद हैं। उपनिषद हमारी आत्मा है। वसुधैव कुटुंबकम की धारणा हमें सनातन धर्म ही सिखाती है ।उन्होंने एक संकल्प करने के लिए कहा कि सभी हिंदू भाई बहन है और तन मन धन प्राण लगाकर हमें धर्म की रक्षा करना है आपसी सम्मान और सहिष्णुता से समाज में एकता लाना जरूरी है। हिंदू केवल धार्मिक पहचान नहीं है यह जीवन जीने की कला है। इन्होंने कहा “कबीरा कुआं एक है पनिहारीन अनेक” सभी को एक सूत्र में धर्म के मार्ग पर चलने के लिए आवाहन किया ।सभी वक्ता विद्वान एवं अपने-अपने क्षेत्र में निपुण है ।सभी श्रोताओं ने वक्तव्य को ध्यान पूर्वक सुना ।

अतिथियों का स्वागत तिलक, चंदन, माला पहनाकर एवं शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह भेंंट करके किया गया । जितने भी श्रोता आए थे सभी का सम्मान पुष्प हार एवं तिलक लगाकर किया गया । श्रोतागण भाव विभोर होकर भजन और संगोष्ठी का आनंद लिया ।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ सुषमा पंड्या जी के द्वारा किया गया जिन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि “पनघट और मरघट” में कोई जाति पांति नहीं है जहां किसी भी जाति का हो सब एक हो जाते हैं ।तो समाज में हमें एकता के साथ समरसता के साथ रहना चाहिए। साथ हीअमृत परिवार एवं अमृत भोज के बारे में भी बताया ।
श्रीमती सुमिता दास गुप्ता जी के द्वारा सरस्वती वंदना एवं भजन प्रस्तुत किया गया।श्रीमती जयंती विश्वास ,सुश्री मधु कश्यप एवं श्री राम प्रसाद जी के द्वारा ढोलक पर संगत करके भजन प्रस्तुत किया गया। श्रीमति अर्पणा जैन एवं श्रीमती ज्योत्सना मिश्रा के द्वारा धर्म पर आधारित कविता प्रस्तुत किया गया। चारू जैन, निवी जैन के द्वारा गीत प्रस्तुत किया गया ।अनुष्का मिश्रा ने कथक नृत्य एवं भजन प्रस्तुत किया। गुरु विहार के नन्हे बच्चों के द्वारा राम दरबार खाटू श्याम बाबा कृष्ण कन्हैया एवं सेना के प्रतिरूप में प्रस्तुति दी गई। जिसमें प्रमुख रूप से अरव शर्मा ,आयुष पाहुजा ,अभ्यांश लांबा ,शिवाय गुप्ता, नैतिक , कार्तिक पाहुजा, वीर जैन ,कियान जैन, रिद्धिमा साहू अथर्व पांडे, शार्विल द्विवेदी, दैविक प्रभुवानी ने बहुत ही उत्तम प्रस्तुति दी। वीर लांबा खाटू श्याम बाबा के प्रतिरूप में बहुत ही मनमोहक प्रस्तुति दी। डाॅ मधुमिता मूर्ति जी के द्वारा प्रश्नोत्तरी किया गया जो रामायण एवं महाभारत से संबंधित था ।कार्यक्रम में लगभग 300 लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के पश्चात अमृत भोज का आयोजन किया गया था।
