13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस :तरंगों पर बसी दुनिया, आवाज़ का जादू, संवेदनाओं का सेतु और जन-जन का सच्चा साथी रेडियो

बिलासपुर, 12 फरवरी 2026/हर वर्ष 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक संचार माध्यम का उत्सव नहीं, बल्कि उन अनगिनत आवाज़ों का सम्मान है जो तरंगों के सहारे सीमाओं को पार कर दिलों तक पहुंचती हैं। तकनीक के तीव्र विस्तार और डिजिटल क्रांति के इस दौर में भी रेडियो अपनी सादगी, सहजता और आत्मीयता के कारण आज भी प्रासंगिक है। रेडियो अब मोबाइल ऐप पर भी उपलब्ध है और वेब के जरिए किसी भी केंद्र को दुनिया के किसी भी कोने में सुना जा सकता है। रेडियो एक ऐसा माध्यम है, जो केवल सूचना नहीं देता, बल्कि संवेदनाएं भी संप्रेषित करता है। ग्रामीण अंचलों से लेकर महानगरों तक, रेडियो ने हर वर्ग के लोगों को जोड़ने का कार्य किया है।

विशेष रूप से किसानों के लिए प्रसारित होने वाले कार्यक्रम, जैसे ‘किसानवाणी’, कृषि संबंधी नवीन जानकारियां और मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बनाते हैं। महिलाएं, युवा और बच्चे सभी के लिए रेडियो पर विविध विषयों पर आधारित कार्यक्रम प्रसारित होते हैं, जो ज्ञान, जागरूकता और मनोरंजन का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करते हैं।


आकाशवाणी बिलासपुर की कार्यक्रम निदेशक डॉ सुप्रिया भारतीयन ने रेडियो को जनसंचार का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि रेडियो एक संतुलित एवं विश्वसनीय जनसंचार माध्यम है, जो सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का समन्वित स्वरूप प्रस्तुत करता है। इसकी सरलता, सुलभता और व्यापक पहुंच ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। बदलते तकनीकी परिवेश में भी रेडियो ने अपनी आत्मीयता और विश्वास को बनाए रखा है।
आकाशवाणी बिलासपुर के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘किसानवाणी’ में बैसाखू भैया ने कहा कि रेडियो आवाज़ की ऐसी दुनिया है, जो श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ती है। डिजिटल युग में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जब लोग पहचान कर स्नेहपूर्वक संबोधित करते हैं, तो वह आत्मीय क्षण रेडियो की ताकत का प्रमाण होता है।राजू भैया ने कहा कि रेडियो देववाणी के समान है, यह ऐसा माध्यम है, जो सीमित संसाधनों में भी अधिकतम लोगों तक सूचना, शिक्षा और मनोरंजन पहुंचाता है। जितू भैया ने रेडियो को स्वस्थ मनोरंजन का सशक्त माध्यम बताया वहीं महंगू भैया ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के विस्तार के बावजूद रेडियो की जनता की आवाज है। आकाशवाणी के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और विशेषकर किसानों के लिए विविध कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। ‘किसानवाणी’ कार्यक्रम से जुड़े हजारों किसान इससे लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी के किसानवाणी कार्यक्रम में किसानों से संवाद के लिए कलाकारों के ऐसे नाम रेडियो पर रखे जाते हैं जिससे वे आत्मीय जुड़ाव महसूस कर सकें और उन्हें अपना मित्र समझें।
आकाशवाणी बिलासपुर के नियमित श्रोताओं भाटापारा से बचकमल,चकरभाठा से डी आर नारवानी, पालचूवा मुंगेली से उत्तरा दिवाकर , गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला से भूपेंद्र कुमार ओट्टी, बसंतपुर पेंड्रा से बंसीलाल श्रीवास्तव, जूना बिलासपुर से अखिलेश देवांगन सुशील देवांगन, पोंड़ी रतनपुर से भानु प्रताप कश्यप ,पोड़ी लाफ़ा से विद्यानंद साहू,त्रिवेण साहू,अलगीडाण्ड पाली से त्रिभुवन कंवर, ग्राम बुड़गहन से रामदुलारी,रामशरण प्रजापति , तखतपुर से मिश्रीलाल विश्वकर्मा मीरा देवी विश्वकर्मा ऐसे अनगिनत नाम है जो रेडियो से आत्मीय जुड़ाव रखते हैं और रेडियो तरंगों के जरिए सूचना, शिक्षा और मनोरंजन प्राप्त करते हैं श्रोता कहते हैं कि रेडियो सुनने के लिए हमे अलग से कोई समय नहीं देना पड़ता अपना काम करते हुए ही हम मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धक जानकारी हासिल करते हैं, रेडियो हमारा सच्चा साथी है।

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