शनिचरी बाजार में निगम की बड़ी कार्रवाई, 4 दुकानें सील होते ही 12 लाख जमा, एक करोड़ से ज्यादा किराया बकाया, वर्षों बाद सख्ती से मचा हड़कंप


बिलासपुर। शहर के सबसे व्यस्त और पुराने व्यापारिक क्षेत्र शनिचरी बाजार में नगर निगम ने लंबे समय से बकाया किराया नहीं देने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम द्वारा चार दुकानों को सील किए जाने के बाद पूरे बाजार में हड़कंप मच गया। कार्रवाई का असर यह रहा कि मौके पर ही 15 दुकानदारों ने करीब 12 लाख रुपये नगर निगम में जमा करा दिए, जबकि कई अन्य व्यापारियों ने एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि चुकाने का आश्वासन दिया है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, किराया बकाया रखने और नियमों का उल्लंघन करने वाली दुकानों पर आगे भी सीलिंग और वसूली की कार्रवाई जारी रहेगी। निगम ने स्पष्ट किया है कि अब वर्षों से लंबित किराया वसूली में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
250 चबूतरे बने पक्की दुकानें, 28 साल से नहीं हुई नई लीज
शनिचरी बाजार में वर्तमान में करीब एक हजार छोटी-बड़ी दुकानें संचालित हो रही हैं। निगम रिकॉर्ड में अब भी लगभग 250 चबूतरे दर्ज हैं, जबकि जमीनी हकीकत में इन स्थानों पर दो से तीन मंजिला पक्की दुकानें बन चुकी हैं। अधिकांश दुकानदार पिछले पांच वर्षों से किराया जमा नहीं कर रहे हैं।
किसी दुकान का मासिक किराया मात्र 500 से 1,000 रुपये होने के बावजूद कुल बकाया राशि एक करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि दुकानों की लीज वर्ष 1997 में ही समाप्त हो चुकी थी, लेकिन पिछले 28 वर्षों से बिना वैध नवीनीकरण के दुकानें संचालित की जा रही हैं। कई दुकानों में नियमों के विपरीत दूसरी और तीसरी मंजिल का निर्माण भी कर लिया गया है।
नगर निगम को भारी राजस्व नुकसान
किराया नहीं मिलने के कारण नगर निगम को वर्षों से भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष में निगम ने दुकानों से 6 करोड़ रुपये किराया वसूली का लक्ष्य तय किया था, जिसमें से अब तक 4 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। शेष 2 करोड़ रुपये की पेंडेंसी में से अकेले 1 करोड़ रुपये शनिचरी बाजार की दुकानों पर बकाया है।
1936 की दुकानें, आज भी बेहद कम किराया
शनिचरी बाजार और गोल बाजार की दुकानें वर्ष 1936 में निर्मित की गई थीं, लेकिन आज तक इनका किराया अपेक्षित दरों पर नहीं बढ़ाया जा सका है। वर्तमान में निगम को इन दुकानों से सालाना केवल 10 से 15 लाख रुपये की ही आय हो पा रही है।
नए सर्वे से खुल सकता है राजस्व का बड़ा रास्ता
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यदि नया सर्वे कराकर अवैध निर्माण का नियमितीकरण किया जाए, तो निगम को 25 करोड़ रुपये से अधिक की आय संभव है। उदाहरण के तौर पर रायपुर मॉडल अपनाने पर वहां निगम को लगभग 100 करोड़ रुपये की आय हुई थी।
नगर निगम ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में शनिचरी बाजार सहित अन्य प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि राजस्व बढ़ाया जा सके और नियमों का पालन सुनिश्चित हो।

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