चर्चित पोरा बाई नकल मामले में कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा

शशि मिश्रा

जांजगीर। जिला कोर्ट ने नकल प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए, 12वीं की टॉपर पोरा बाई सहित पांच लोगों को कोर्ट ने सुनाई सजा, 5 साल कठोर कारावास और 5 हजार जुर्माना किया है।

कोर्ट ने 468/120 बी भा.द.सं. 1860 व 471/120 बी भा.द.सं. 1860 के तहत 05 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना की राशि न जमा करने पर तीन महीने अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने अपने फैसले में आरोपी पोराबाई, एस.एल. जाटव, दीपक जाटव एवं फुलसाय नृसिंह को भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420/120 बी, 467/120 बी, 468/120 बी, 471/120 के अधीन दंडनीय अपराध कारित करने हेतु दी गई उपर्युक्त सजाएं साथ साथ चलेंगी।

इस प्रकरण में अभियुक्त पोराबाई द्वारा 25.अगस्त.2008 से 07.फरवरी 2009 तक कुल 167 दिवस, फूलसाय 15.दिसम्बर 2009 से 05.मार्च 2010 तक कुल 81 दिवस, शिवलाल जाटव 27.मार्च 2009 से 20.नवंबर 2009 तक कुल 238 दिवस एवं दीपक सिंह जाटव 27.मार्च 2009 से दिनाक 26.सितंबर.2009 तक कुल 184 दिवस विचारण के दौरान अभिरक्षा मे बिताई गई अवधि धारा 428 दं.प्र.सं. के अंतर्गत पृथक से प्रमाण पत्र तैयार किया जाये। अभियुक्तगण द्वारा अभिरक्षा मे बितायी गयी अवधि धारा 428 सहपठित धारा 432 दं.प्र.सं. के अंतर्गत सजा का परिहार किए जाते समय नियमानुसार समायोजित की जा सकती है।

प्रकरण में जप्तशुदा संपत्ति प्रकरण संबंधी दस्तावेज यथा-केन्द्राध्यक्ष नियुक्ति आदेश, सील, दाखिल खारिज पंजी, पाठकान पंजी, स्थानांतरण आदेश, कार्यमुक्ति आदेश, कार्यभार ग्रहण पत्र, परीक्षा कार्य सहयोग आदेश, टी० आर० खुंटे का मृत्यु प्रमाण पत्र, परीक्षा आवेदन पत्र, अभियुक्ता पोराबाई की विषय हिंदी, अंग्रेजी, जीव-विज्ञान, भौतिक शास्त्र, रसायन विज्ञान की उत्तरपुस्तिकाएं, उपस्थिति पत्रक, परीक्षा आवेदन पत्र, बैठक व्यवस्था विवरण, उत्तरपुस्तिका जमा आदेश, नोटबुक, कॉपी, पावती पत्र, अभिरक्षा पंजी, स्टॉक रजिस्टर एवं अन्य दस्तावेज प्रकरण का भाग होने से अभिलेख के साथ संलग्न रखा जावे। अपील होने पर माननीय अपीलीय न्यायालय के आदेशानुसार संपत्ति का निराकरण किया जाएगा।
क्या है मामला

वर्ष 2008 में माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं परीक्षा में फर्जीवाड़े के मामले में अपील अदालत ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। यह मामला बिर्रा परीक्षा केंद्र से जुड़ा है, जहां 12वीं की परीक्षा में शामिल एक छात्रा को 500 में से 484 अंक प्राप्त हुए थे और वह सीजी टॉपर बनी थी, जबकि जांच में यह सामने आया कि उत्तरपुस्तिका उसकी लिखावट की नहीं थी।

मामले की शिकायत के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जांच प्रारंभ की गई थी। जांच उपरांत बम्हनीडीह थाने में अपराध दर्ज किया गया। प्रकरण की विवेचना पूर्ण होने के बाद जेएमएफसी न्यायालय चांपा में चालान प्रस्तुत किया गया था।

न्यायिक प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2020 में आरोपियों को निचली अदालत से राहत मिली थी। इसके विरुद्ध अभियोजन पक्ष द्वारा अपील प्रस्तुत की गई। अपील की सुनवाई द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गणेश राम पटेल की अदालत में हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!