

बिलासपुर। कांग्रेस संगठन में रुपए लेकर पार्षद का टिकट बांटने और ब्लॉक अध्यक्ष बनवाने के आरोपों का मामला अब पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बन गया है। मंडल अध्यक्ष गजेंद्र श्रीवास्तव द्वारा पूर्व अध्यक्ष पर लगाए गए गंभीर आरोपों की जानकारी संगठन के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंच चुकी है। हालांकि, जिन पर आरोप लगाए गए हैं, उन पूर्व अध्यक्ष विजय पांडेय की ओर से अब तक किसी तरह की औपचारिक शिकायत नहीं की गई है।
दरअसल, कांग्रेस मंडल अध्यक्ष गजेंद्र श्रीवास्तव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूर्व अध्यक्ष को दलाल बताते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने पैसे लेकर पार्षदों को टिकट बांटे और ब्लॉक अध्यक्ष बनवाए। पोस्ट में यह भी लिखा गया था कि जो लोग कभी कांग्रेस भवन नहीं आए, वे भी कांग्रेस नेता कहलाने लगे। पार्टी द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद गजेंद्र का यह पोस्ट डिलीट करा दिया गया था।
चूंकि उस समय विजय पांडेय ही शहर अध्यक्ष थे, इसलिए माना जा रहा है कि यह आरोप उन्हीं पर इशारों-इशारों में लगाए गए थे। हालांकि विजय पांडेय इन आरोपों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और उन्होंने अब तक संगठन या किसी अन्य मंच पर शिकायत दर्ज नहीं कराई है। चर्चा है कि पांडेय स्वयं नहीं चाहते कि यह मामला और तूल पकड़े।
इधर, गजेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि संबंधित पोस्ट पुरानी थी और किसी द्वारा लाइक किए जाने के कारण वह दोबारा फेसबुक वॉल पर ऊपर आ गई। उन्होंने किसी नए विवाद से इनकार किया है।
संगठन के बड़े नेताओं तक पहुंचा मामला
सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण की जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) तक भी पहुंचा दी गई है। हालांकि अभी तक संगठन स्तर पर कोई आधिकारिक कार्रवाई या जांच शुरू नहीं की गई है। नए शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई है। वहीं जिले के प्रभारी महामंत्री सुबोध हरितवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
स्पेशल ब्रांच ने भी ली जानकारी
मामले में पुलिस की डिस्ट्रिक्ट स्पेशल ब्रांच की रुचि भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि स्पेशल ब्रांच ने मंडल अध्यक्ष के फेसबुक पोस्ट से जुड़े साक्ष्य एकत्र कर उन्हें उच्च अधिकारियों को भेज दिया है। उल्लेखनीय है कि स्पेशल ब्रांच राजनीतिक गतिविधियों पर भी निगरानी रखती है।
सूत्रों का कहना है कि जहां कुछ लोग इस मामले को संगठन के बड़े नेताओं तक पहुंचाने में लगे हैं, वहीं कुछ लोग इसे दबाने की कोशिश भी कर रहे हैं। फिलहाल, शिकायत न होने के चलते मामला संगठनात्मक चर्चा तक ही सीमित बना हुआ है।
