

ज़िला कांग्रेस कमेटी ( शहर/ग्रामीण ) द्वारा आज स्वन्त्रता सेनानी सुभाषचन्द बोस जी की जयंती मनाई गई ,उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
इस असवर पर शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई में अमिट योगदान देने वाले बाबू सुभाषचन्द बोस ने अंग्रेजो को देश से भगाने के लिए अनेक राष्ट्राध्यक्षो से सम्पर्क किया ,और आज़ाद हिंद फौज का गठन किया,आज़ाद हिंद फौज द्वितीय विश्व युद्ध मे अंग्रेजो के विरुध्द युद्ध की घोषणा की और उन्हें आशातीत सफलता भी मिली । जिसका कोहिमा की जलवायु का अनुकूल न होना और सैनिकों के बीमार होने के कारण थे।
ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने
सुभाषचन्द बोस दो बार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने ,किन्तु वैचारिक मतभेद के कारण कांग्रेस छोड़ना पड़ा, उन्होंने फारवर्ड ब्लॉक् का गठन कर युवाओ को आज़ादी की लड़ाई के लिये प्रेरित किया ,उन्होंने ” जय हिंद” ” दिल्ली चलो ” तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा ,जैसे कालजयी नारे दिए जो आज भी प्रासंगिक है ,उन्होंने रेडियो से पहली बार गांधी जी को राष्ट्रपिता कह कर सम्बोधित किया, जब सुभाष चंद बोस आज़ाद हिंद फौज में भर्ती कर रहे थे तब अंग्रेज परस्त भारतीय उनका विरोध कर रहे थे और अंग्रेजी सेना में गांव गांव जाकर भर्ती करा रहे थे, एक प्लेन क्रैश में उनका निधन हुआ ,उनके निधन के बाद प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उनकी पत्नी को ताउम्र पेंशन देना सुनिश्चित किया ,
संयोजक ज़फर अली,हरीश तिवारी ने कहा कि सुभाष चंद बोस के जन्म 1897 में ओडिसा में एक साधन संपन्न कुलीन परिवार में हुआ ,उनके पिता एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे ,जिनका अंग्रेजो से घनिष्ठ सम्पर्क था, कुशाग्र बुद्धि के सुभाष बाबू ने प्रथम प्रयास में ही आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की किन्तु देशप्रेम के कारण नौकरी नही की, सुभाष बाबू अनेको बार जेल में रहे, और एक स्थिति ऐसी भी आई कि उन्हें निर्वासित जीवन के लिए मजबूर होना पड़ा ,विश्वयुद्ध के समय अनेक देशों ने स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी और जापान ने अंडमान निकोबार को सुभाष बाबू को दिया ,उनका जीवन संघर्ष पूर्ण रहा ,ऐसे महान देशभक्त के प्रपौत्र को भाजपा के एसआईआर में देश की नागरिक होने के लिए प्रमाण देना पड़ रहा है।
