

ज़िला कांग्रेस कमेटी ( ग्रामीण /शहर ) द्वारा 11 जनवरी को लालबहादुर शास्त्री स्कूल प्रांगण में दूसरे प्रधानमंत्री स्व लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि मनाई गई और उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई ।
इस अवसर पर ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि शास्त्री जी की फिजिकल रूप से पतले दुबले थे किंतु एक मजबूत इरादों के नेता थे ,उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में जब बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए ऐसी स्थिति में शास्त्री जी ने आंदोलन का नेतृत्व किया और गिरफ्तार हुए ,वे एक सौम्य, सहज ,और सरल व्यक्तित्व के धनी थे ,इन्होंने पुलिस प्रशासन में कई नियम लागू किया जो आज भी प्रचलन में है।
शास्त्री जी की सोच थी ,सीमा पर देश की सुरक्षा सेंना करती है जबकि देश के अंदर किसान जिसके अन्न से देश आर्थिक रूप से मजबूत होता है ,लोगो को दो जून का भोजन मिलता है ,इसलिए शास्त्री जी ” जय जवान -जय किसान ” का नारा देकर सेना और किसानों का मनोबल ऊपर उठाया ,उन्होंने यूपी सरकार में कंडक्टर के रूप में महिलाओं की नियुक्ति की और भीड़ को तीतर बितर करने के लिए लाठी चार्ज की जगह पानी की बौछार की शुरुआत की ।
संयोजक ज़फर अली , हरीश तिवारी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री जी की प्रारंभिक जीवन संघर्ष और अभाव में गुजरा ,शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को एक कायस्थ परिवार में हुआ ,कुशाग्र बुद्धि के शास्त्री जी ने गंगा को तैर कर पढ़ने जाते थे ,उन्होंने पाकिस्तान को 1965 के युद्ध मे धूल चटा दी और लौहार तक कब्जा कर लिया गया था , जनवरी 1966 में ताशकन्द समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ और उसी रात शास्त्रीजी का ताशकन्द में निधन हो गया । आरोप है कि ताशकंद में उनकी राजनीतिक हत्या कराई गई थी। शास्त्री जी को असली श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके हत्यारो का नाम सार्वजनिक हो और देश इससे परिचित हो कि आखिर शास्त्री जी की हत्या किसने और क्यों करवाई थी।
कार्यक्रम में
ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री,संयोजक ज़फर अली, हरीश तिवारी,माधव ओत्तालवार त्रिभुवन कश्यप,विनोद साहू,सत्येंद्र तिवारी, ब्रम्ह देव ठाकुर,सुनील पांडेय,अन्नपूर्णा ध्रुव, शुभलक्ष्मी सिंह,करम गोरख,सुरेन्द्र तिवारी,गजेंद्र श्रीवास्तव,शाहनवाज खान,दीपक रायचेलवार,गौरव एरी,आनन्द सिंह,राजेश केसरी आदि उपस्थित थे।
