

मुंगेली | 07 जनवरी 2026
संगठित जुआ कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को एक बड़ी कानूनी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने जिला मुंगेली के थाना फास्टरपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 66/2025 के मुख्य आरोपी योगेंद्र शर्मा उर्फ लाल महाराज उर्फ भर्रा की अग्रिम जमानत याचिका को सख्ती से खारिज कर दिया है। माननीय न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने आरोपी के आपराधिक इतिहास और संगठित अपराध में उसकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए यह अहम फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार, 07 अक्टूबर 2025 को थाना फास्टरपुर पुलिस ने ग्राम विचारपुर में छापा मारकर रवि कुमार आंचल को जुआ खेलते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान खुलासा हुआ कि रवि कुमार वर्ष 2021 से मुख्य सरगना योगेंद्र शर्मा के इशारे पर संगठित जुआ नेटवर्क का संचालन कर रहा था। जुए से जुड़ा पूरा हिसाब-किताब मोबाइल के जरिए साझा किया जाता था और लेन-देन UPI (फोनपे) व नकद माध्यम से होता था।
जांच में सामने आए अहम तथ्य
पुलिस जांच में योगेंद्र शर्मा और सह-आरोपियों के SBI व ICICI बैंक खातों के बीच ₹7,05,945 से अधिक के संदिग्ध लेन-देन के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इसके साथ ही यह भी सामने आया कि आरोपी एक आदतन अपराधी है, जिसके विरुद्ध जुआ अधिनियम के तहत पूर्व में कई मामले दर्ज हैं और कई प्रकरणों में उसे दोषी ठहराया जा चुका है। डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से आरोपी द्वारा सुनियोजित जुआ सिंडिकेट चलाया जा रहा था।
फरार आरोपी पर इनाम, गिरफ्तारी के प्रयास तेज
आरोपी योगेंद्र शर्मा लंबे समय से फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक मुंगेली श्री भोजराम पटेल द्वारा ₹1,000 नकद इनाम घोषित किया गया है। जिलेभर में आरोपी के पोस्टर चस्पा किए गए हैं। हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हो गई है और दबिश लगातार जारी है।
थाना फास्टरपुर प्रभारी द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया कि माननीय उच्च न्यायालय का यह निर्णय संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की लड़ाई को और मजबूती देता है। जुआ माफिया योगेंद्र शर्मा को शीघ्र गिरफ्तार कर कानून के शिकंजे में लिया जाएगा। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि आरोपी से संबंधित कोई भी सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
यह फैसला न केवल जुआ माफिया के लिए चेतावनी है, बल्कि संगठित अपराध के खिलाफ प्रशासन की सख्त मंशा को भी दर्शाता है।
