
आकाश दत्त मिश्रा

रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक 40 वर्षीय दुकानदार की ज़िंदगी उस समय पल भर में बदल गई, जब वे सुबह घर पर सामान्य रूप से दांत ब्रश कर रहे थे। अचानक उनकी गर्दन में तेज दर्द उठा और देखते ही देखते पूरी गर्दन बल्ब की तरह सूज गई। कुछ ही मिनटों में सांस फूलने लगी और वे बेहोश होकर गिर पड़े। घबराए परिजन उन्हें तुरंत डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) की इमरजेंसी लेकर पहुंचे।
मेकाहारा में की गई सीटी एंजियोग्राफी जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मरीज की दाहिनी कैरोटिड आर्टरी अपने आप फट चुकी थी और उसके आसपास खून जमकर एक खतरनाक गुब्बारे जैसी संरचना बन गई थी, जिसे मेडिकल भाषा में कैरोटिड आर्टरी स्यूडोएन्युरिज्म कहा जाता है। कैरोटिड आर्टरी दिल से सीधे दिमाग तक ऑक्सीजनयुक्त खून पहुंचाने वाली मुख्य नस होती है। इसका फटना सीधे तौर पर जानलेवा स्थिति मानी जाती है, जिससे ब्रेन में ब्लड सप्लाई रुक सकती है, लकवा या ब्रेन डेड होने तक का खतरा रहता है।
डॉक्टरों के अनुसार बिना किसी चोट, संक्रमण या पुरानी बीमारी के अपने आप कैरोटिड आर्टरी का फटना दुनिया भर में बेहद दुर्लभ है। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में ऐसे केवल 10–12 केस ही दर्ज हैं। यह मरीज पूरी तरह स्वस्थ था, जिससे यह केस और भी चुनौतीपूर्ण हो गया। गर्दन में अत्यधिक खून जमा होने के कारण सर्जरी के दौरान नस को पहचानना तक मुश्किल था।

हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने कई घंटे तक चली हाई रिस्क सर्जरी को अंजाम दिया। फटी हुई नस को रिपेयर करने के लिए बोवाइन पेरिकार्डियम पैच जैसे विशेष बायोलॉजिकल मटेरियल का इस्तेमाल किया गया। ऑपरेशन के दौरान हर पल गंभीर खतरा बना रहा, क्योंकि जरा सी चूक मरीज को स्थायी लकवे या गंभीर ब्रेन डैमेज की ओर ले जा सकती थी।
सफल सर्जरी के बाद मरीज को किसी भी प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्या नहीं हुई और अब वे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ में अपनी तरह का पहला सफल केस माना जा रहा है।
इस जटिल सर्जरी में डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू (कार्डियक एनेस्थेटिस्ट), जूनियर डॉक्टर्स आयुषी, अंशिका, ख्याति, आकांक्षा साहू, संजय, ओम प्रकाश, नर्सिंग स्टाफ राजेंद्र, नरेंद्र, चोवा, दुष्यंत, मुनेश, नुतन, प्रियंका, शीबा तथा टेक्नीशियन भूपेंद्र और हरीश ने दिन-रात मेहनत की।
अस्पताल के डीन डॉ. विवेक चौधरी और सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर ने पूरी मेडिकल टीम को इस ऐतिहासिक और जीवनरक्षक सर्जरी के लिए बधाई दी। यह उपलब्धि न केवल मेकाहारा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
