

बिलासपुर।
जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही लगातार सामने आ रही है। आवारा कुत्तों और मवेशियों का स्कूल परिसरों में बेधड़क प्रवेश बच्चों के लिए खतरा बनता जा रहा है। ताजा मामला सकरी और तिफरा क्षेत्र का है, जहां कुत्तों के हमले और स्कूल गेट पर मवेशियों के जमावड़े ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।
सकरी शासकीय प्राथमिक कन्या शाला में पढ़ने वाली एक छात्रा सहित गांव के दो अन्य बच्चों को आवारा कुत्ते ने काट लिया। घायल बच्चों को सिम्स और निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उन्हें रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। इससे पहले खमतराई स्थित पीएम श्री स्कूल में भी चार दिन पहले आवारा कुत्ते ने एक छात्र और दो शिक्षिकाओं को काट लिया था।
तिफरा स्कूल गेट पर मवेशियों का डेरा
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिन्दी माध्यम विद्यालय, तिफरा (विकास खंड बिल्हा) में मंगलवार दोपहर स्कूल के मुख्य गेट पर गाय, सांड और कुत्तों का झुंड खड़ा नजर आया। दोपहर करीब एक बजे जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची, तब स्कूल परिसर में एक गाय और एक सांड खड़े थे, जबकि एक गाय धूप में बैठी हुई थी। टीम को देखकर स्कूल का चपरासी डंडा लेकर मवेशियों को भगाने की कोशिश करता दिखाई दिया।
बाउंड्रीवॉल और गेट की समस्या
बताया जा रहा है कि कई स्कूलों में बाउंड्रीवॉल टूटी हुई है या गेट क्षतिग्रस्त हैं। सकरी प्राइमरी स्कूल के चारों ओर झुग्गी-झोपड़ियां बसी हैं। स्कूल का मुख्य गेट टूटा होने के कारण आसपास रहने वाले लोग और उनके मवेशी बिना रोक-टोक परिसर में आ-जा रहे हैं। स्कूल की प्रधान पाठक गायत्री सिंह ने बताया कि कक्षा आठवीं की छात्रा मोना कैवर्त पर स्कूल गेट के पास ही आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था। छात्रा को तत्काल सिम्स ले जाकर रैबीज का इंजेक्शन लगवाया गया।
निगम की कार्रवाई अधूरी
नगर निगम की टीम ने तिफरा क्षेत्र में तीन आवारा कुत्तों को पकड़ा, लेकिन बच्चों को काटने वाले कुत्ते को पकड़ने में टीम असफल रही। इससे अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है।
डीईओ का बयान
जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने बताया कि सभी स्कूलों में इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि आवारा कुत्ते व मवेशी स्कूल परिसर में प्रवेश न करें। उन्होंने कहा कि काटे गए बच्चों को रैबीज का इंजेक्शन लगवाया गया है।
हालांकि हकीकत यह है कि कई स्कूलों की टूटी दीवारें, खुले रास्ते और क्षतिग्रस्त गेट अब भी खतरे का कारण बने हुए हैं। स्कूल प्रबंधन द्वारा कई बार रास्ते बंद करने और बाउंड्रीवॉल दुरुस्त करने की मांग के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक लापरवाही पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं।
