DMF मद में भारी भ्रष्टाचार का आरोप, जांच टीम गठित लेकिन 26 दिन बाद भी कार्रवाई शून्य, शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट जाने की दी चेतावनी

आकाश दत्त मिश्रा


मुंगेली।
जिला बनने के बाद से ही मुंगेली में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। अब जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद में हुए कथित भयंकर भ्रष्टाचार और हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि डीएमएफ की राशि का दुरुपयोग कर अवैध कॉलोनी में निजी भूमाफिया की जमीन पर सड़क निर्माण कराया गया, जिससे शासन को लाखों रुपये की क्षति पहुंची है।
इस पूरे मामले की शिकायत मुंगेली निवासी अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED), आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मुख्य सचिव और संभागायुक्त से की है। शिकायत में दोषी अधिकारियों और भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री को इस संबंध में स्मरण पत्र भी भेजा गया है।
अवैध कॉलोनी में DMF राशि से सड़क निर्माण
शिकायत के अनुसार मुंगेली नगर पालिका परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सोनकर सेल्स अवैध कॉलोनी में ग्राम पंचायत करही द्वारा डीएमएफ मद से 14.98 लाख रुपये की लागत से सीमेंट कांक्रीटीकरण (सीसी रोड) का निर्माण कराया गया। यह सड़क डायग्नोसिस सेंटर वाली गली में बनाई गई, जो निजी व्यक्ति व कथित भूमाफिया की जमीन बताई जा रही है।
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला खनिज संस्थान न्यास, मुंगेली द्वारा दिनांक 21 अगस्त 2023 को उक्त कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। जबकि स्वीकृति आदेश की शर्त क्रमांक 07 में स्पष्ट उल्लेख है कि “स्वीकृत कार्य में भू-अर्जन का कोई प्रावधान नहीं है, अतः निर्विवाद शासकीय भूमि में ही कार्य कराया जावे।”
इसके बावजूद नगर पालिका से प्राप्त लिखित जानकारी में उक्त स्थल को अवैध कॉलोनी व निजी भूमि बताया गया है, जो नियम-कानून का घोर उल्लंघन है।
ACB-EOW के पत्र के बाद भी कार्रवाई में देरी
अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी की शिकायत पर आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो मुख्यालय रायपुर ने 23 अप्रैल 2025 को कलेक्टर मुंगेली को पत्र जारी कर वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक डीएमएफ मद से हुए सभी कार्यों, निर्माण, मरम्मत और खरीदियों की तथ्यात्मक रिपोर्ट 15 दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
आरोप है कि इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
नवंबर-दिसंबर में मामला मीडिया में आने और आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगे जाने के बाद कलेक्टर कार्यालय ने 5 दिसंबर 2025 को जिला पंचायत सीईओ को पुनः तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
3 सदस्यीय जांच टीम गठित, जांच शुरू नहीं
इसके बाद जिला पंचायत सीईओ द्वारा 11 दिसंबर 2025 को डीएमएफ मद में हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए तीन सदस्यीय जिला स्तरीय जांच टीम गठित की गई।
जांच टीम में —
एसडीएम
नगर पालिका के सीएमओ
लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यपालन अभियंता
को शामिल किया गया। आदेश में सात दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन और स्पष्ट अभिमत देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 26 दिन बीत जाने के बाद भी जांच शुरू नहीं होने का आरोप है।
हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
मामले में शिकायतकर्ता अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी का कहना है कि यदि इस प्रकरण में निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्ण जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि जांच टीम कब सक्रिय होती है और डीएमएफ मद में हुए इस कथित बड़े घोटाले पर क्या कार्रवाई होती है।

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