

बिलासपुर।
न्यायधानी बिलासपुर में सरकार द्वारा प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक एवं पॉलीथीन की बिक्री और उपयोग खुलेआम जारी है, लेकिन नगर निगम प्रशासन इस पर प्रभावी रोक लगाने में असफल नजर आ रहा है। शहर के बाजारों, चौक-चौराहों और गली-मोहल्लों में सिंगल यूज प्लास्टिक का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है, जिसे उपयोग के बाद कचरा कंटेनरों में डालने के बजाय खुले में फेंक दिया जाता है। इससे न केवल शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लास्टिक और पॉलीथीन के कारण गलियों में कचरा फैल रहा है और नालियां जाम हो रही हैं। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि प्लास्टिक के सेवन से कई बार बेजुबान जानवरों की मौत भी हो जाती है, जो अत्यंत चिंताजनक है। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा न तो सख्त कार्रवाई की जा रही है और न ही जागरूकता अभियान प्रभावी रूप से चलाए जा रहे हैं।
शहरवासियों का सुझाव है कि अंबिकापुर नगर निगम की तर्ज पर बिलासपुर में भी सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथीन पर पूर्ण प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर ऐसी मशीनें स्थापित की जाएं, जिनमें प्लास्टिक या पॉलीथीन डालने पर लोगों को प्रोत्साहन स्वरूप निःशुल्क नाश्ता या भोजन उपलब्ध कराया जाए, जिससे आमजन स्वयं प्लास्टिक जमा करने के लिए आगे आएं।
इसके साथ ही मांग की जा रही है कि जो दुकानदार सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग या बिक्री करते हुए पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। राज्य की सीमाओं पर चेकिंग प्वाइंट बनाकर पुलिस की मौजूदगी में नियमित जांच अभियान चलाया जाए और प्लास्टिक से भरे वाहनों को जब्त किया जाए।
निगम प्रशासन से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि शहर के सभी जोनों में विशेष टीमें गठित कर दुकानों, सब्जी बाजारों और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया जाए। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प के रूप में जूट के थैलों को प्रोत्साहित किया जाए और शहर के बाजारों में जूट थैलों का निःशुल्क या रियायती वितरण किया जाए।
शहरवासियों का कहना है कि यदि नगर निगम प्रशासन सख्त कदम उठाए और आमजनों को जागरूक कर वैकल्पिक साधनों के उपयोग को बढ़ावा दे, तो न्यायधानी बिलासपुर को भी प्लास्टिक मुक्त शहर बनाया जा सकता है।
