
आकाश दत्त मिश्रा

लोकसभा चुनाव के लिए बिलासपुर सीट से लगातार दावेदारी सामने आ रही है। सर्वे रिपोर्ट में कांग्रेस से संतोष कौशिक, विजय पांडे और दिलीप लहरिया का नाम सामने निकल कर आया है, तो वहीं भाजपा में रजनीश सिंह अमर अग्रवाल और डॉक्टर ललित मखीजा के नाम चर्चा में है। पिछले दिनों पर्यवेक्षको के समक्ष 50 से अधिक दावेदारों ने भाजपा से दावेदारी की। असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चमत्कारी व्यक्तित्व और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से भाजपा की जीत सुनिश्चित नजर आ रही है। ऐसे में असली संघर्ष तो केवल टिकट हांसिल करने में ही है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में दावेदार इस बार लोकसभा चुनाव के लिए दावेदारी कर रहे हैं।
बिलासपुर लोकसभा सीट में मुंगेली जिले के केवल दो ही विधानसभा शामिल है। इसके बावजूद विगत कुछ वर्षों में लगातार लोकसभा चुनाव में मुंगेली के प्रत्याशी को ही वरीयता दी गई । कभी पुन्नू लाल मोहले तो कभी लखन लाल साहू तो फिर अरुण साव के रूप में मुंगेली के प्रत्याशियों को अवसर मिला। इस बार विधानसभा चुनाव के बाद बिलासपुर जिले के किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। जबकि मुंगेली जिले के लोरमी विधायक अरुण साव उपमुख्यमंत्री बन गए। इसलिए इस बार बिलासपुर से ही लोकसभा प्रत्याशी देने की मांग जोर पकड़ रही है। पहले जातिगत समीकरण को देखते हुए बिलासपुर लोकसभा से जहां ओबीसी को अवसर दिया जा रहा था तो वही इस बार सुनिश्चित जीत को देखते हुए बिलासपुर से ब्राह्मण प्रत्याशी मांग की जाने लगी है। अगर बिलासपुर से ब्राह्मण प्रत्याशी को अवसर दिया गया तो उसमें एक नाम आशीष शुक्ला का भी हो सकता है।

उप महाधिवक्ता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय आशीष शुक्ला लगातार भारतीय जनता पार्टी के बड़े समर्थक और मुखर वक्ता रहे हैं ।वकालत का लंबा अनुभव और इसी कारण से समाज में गहरी पैठ रखने वाले आशीष शुक्ला अपनी बातचीत की सौम्य शैली और मिलनसार स्वभाव के लिए सबके बीच बेहद लोकप्रिय है। राजनीतिक जगत में हो या आम लोगों के बीच, उनके सबसे मधुर संबंध है । वे कानूनी और सरकारी कार्यप्रणालियों से भी भली-भांति अवगत है। शांतचित्त, मिलनसार स्वभाव होने की वजह से वे मित्रों और विपक्षियों के बीच भी समान रूप से सम्माननीय है। विधिपूर्वक तरीके से समस्याओं का समाधान करना उनकी पहचान है।
अधिवक्ता आशीष शुक्ला भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं । इसके अलावा संघ के धर्म जागरण समन्वय विभाग के प्रांत विधि प्रमुख का भी दायित्व उन्होंने संभाला है ।प्रधानमंत्री की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ भी वे लंबे समय तक जुड़े रहे । एक वक्ता के तौर पर भी वे लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों और योजनाओं को जनता तक पहुंचाते रहे है।
पिछले लोकसभा चुनाव में भी उनका नाम जोरो से उछला था और उन्हें इस रेस में काफी आगे माना जा रहा था, लेकिन आखरी वक्त पर जातिगत समीकरण की वजह से अरुण साव को अवसर मिल गया।
आशीष शुक्ला की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है। मदन भैया के नाम से चर्चित स्वर्गीय श्री मदनलाल शुक्ला जांजगीर लोकसभा सीट से 1977 से लेकर 1980 तक सांसद रहे। आपातकाल के दौरान उन्हें 19 महीने तक सेंट्रल जेल में रखा गया था। कांग्रेस के उत्थान के दौर में मदनलाल शुक्ला ने जन संघ की ओर से दो बार बिलासपुर और कोटा विधानसभा से चुनाव लड़ा और वे विपरीत परिस्थितियों में भी बेहद कम वोटो के अंतर से हारे थे। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए आशीष शुक्ला भी सक्रिय राजनीति में आने को तैयार दिख रहे हैं। बिलासपुर लोकसभा सीट से पिछली बार भी पार्टी ने एक अधिवक्ता को अवसर दिया था, इसलिए भी आशीष शुक्ला की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है। पिछला अनुभव बताता है कि अधिक शोर शराबा किए बगैर जो पार्टी का कार्यकर्ता चुपचाप पार्टी के लिए कार्य करता रहा है, उसकी झोली में टिकट आया है। इस पैमाने पर भी आशीष शुक्ला खरे नजर आ रहे हैं, हालांकि ब्राह्मण दावेदार के तौर पर प्रणव शर्मा समदरिया ने भी अपनी दावेदारी पेश की है, लेकिन फिलहाल आशीष शुक्ला की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला शायद उसकी भरपाई इस बार की जाए।
