

बिलासपुर में मई महीने की भीषण गर्मी अब केवल मौसमी बदलाव नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे तेजी से बिगड़ते पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज से जोड़कर देखा जा रहा है। मौसम और पर्यावरण पर नजर रखने वाली संस्था AQI.in की ताजा रिपोर्ट में बिलासपुर का क्लाइमेट चेंज स्कोर 67 दर्ज किया गया है, जिसे “वेरी हाई” यानी बेहद गंभीर श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 16 वर्षों में शहर की मौसमी सेहत 31.6 प्रतिशत तक बिगड़ चुकी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक शहर में तेजी से बढ़ते कंक्रीट निर्माण, डामर की सड़कों और पेड़ों की कटाई ने बिलासपुर को “हीट आइलैंड” में बदल दिया है। इसका असर यह है कि अब दिन के साथ रात का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने लगा है। सीपत रोड, लिंक रोड, राजकिशोर नगर और मंगला चौक जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा गर्मी महसूस की जा रही है। जिन स्थानों पर पहले हरियाली और खाली जमीन थी, वहां अब कंक्रीट निर्माण बढ़ने से तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
पिछले पांच दिनों से शहर में तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। 20 मई को अधिकतम तापमान 45 डिग्री दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आने लगी हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक कहीं-कहीं हीट वेव जैसी स्थिति बने रहने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार ओडिशा के आंतरिक भागों और आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊपर तक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। वहीं उत्तर-पश्चिम उत्तरप्रदेश से छत्तीसगढ़ और आंतरिक ओडिशा तक द्रोणिका फैली हुई है, जिसका असर मौसम पर पड़ रहा है।
