

बिलासपुर। बिजली विभाग के सकरी वितरण केंद्र में कार्रवाई को लेकर विभाग का दोहरा रवैया सामने आया है। एक ओर 15 दिन की अर्जित अवकाश पर चल रहीं जूनियर इंजीनियर कंचन खूंटे का तबादला जयरामनगर कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर असिस्टेंट इंजीनियर प्रमोद चौबे पर गंभीर आरोपों और शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, जेई कंचन खूंटे को पहले निलंबन के दौरान पेंड्रारोड अटैच किया गया था। बाद में उन्हें फिर सकरी वितरण केंद्र का प्रभार सौंप दिया गया। इसी बीच अवकाश पर रहने के दौरान उनका तबादला जयरामनगर कर दिया गया।
वहीं एई प्रमोद चौबे पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। सकरी क्षेत्र की एक कॉलोनी में बिजली चोरी कर निर्माण कार्य किए जाने के मामले में रायपुर, दुर्ग और भिलाई से जांच टीम पहुंची थी। टीसी मीटर जांच में करीब 48 लाख रुपए की बिजली चोरी पकड़ी गई थी। मामले में विभाग ने प्रमोद चौबे से स्पष्टीकरण जरूर मांगा, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
इसके अलावा हाल ही में आई आंधी के दौरान सकरी क्षेत्र की बिजली व्यवस्था प्रभावित होने पर लोगों ने अधिकारियों पर फोन नहीं उठाने के आरोप लगाए थे। उसलापुर में बिजली कार्यालय का घेराव भी किया गया था। 1912 कॉल सेंटर के कर्मचारियों ने भी अधिकारियों द्वारा फोन रिसीव नहीं करने की बात कही थी, लेकिन विभाग ने इस मामले में भी जवाब तलब तक नहीं किया।
नरोतीकापा क्षेत्र के किसानों ने ट्रांसफार्मर लगाने के बदले 60 हजार रुपए मांगने का आरोप भी लगाया था। इस मामले का ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रांसफार्मर लगाने के लिए मुख्यालय स्तर से स्वीकृति नहीं ली गई थी। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले में विभागीय अधिकारियों का कहना है कि 48 लाख रुपए की बिजली चोरी सामने आने के बाद एई प्रमोद चौबे से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन फिलहाल उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं जेई कंचन खूंटे के तबादले को लेकर विभाग का कहना है कि उनके खिलाफ पहले भी कॉल रिसीव नहीं करने और इमरजेंसी में मौके पर नहीं पहुंचने की शिकायतें मिलती रही थीं।
