850 ग्राम के प्रीमैच्योर नवजात को मिला नया जीवन, 48 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौटा मासूम

बिलासपुर। कहते हैं कि जब उम्मीद की आखिरी किरण भी धुंधली पड़ने लगे, तब दुआ और समर्पण ही जीवन का सहारा बनते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण मध्यनगरी चौक ईदगाह रोड स्थित में देखने को मिला, जहां डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की अथक मेहनत ने 28 सप्ताह में जन्मे 850 ग्राम के गंभीर प्रीमैच्योर नवजात को नया जीवन दिया।

जानकारी के अनुसार 30 मार्च 2026 को हैदराबाद के गायत्री नगर मीरपेठ निवासी शिव कुमार मानकर और उनकी पत्नी सुभाषिनी मानकर के नवजात शिशु को अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जन्म के समय बच्चे का वजन मात्र 850 ग्राम था और उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। इसके अलावा हृदय संबंधी जटिलताएं, मस्तिष्क में रक्तस्राव और बढ़ते संक्रमण ने स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया था।

अस्पताल के डायरेक्टर और उनकी टीम ने तुरंत उपचार शुरू किया। नवजात को प्रारंभिक दिनों में हाई ऑक्सीजन फ्लो सपोर्ट पर रखा गया और आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर सहायता सहित अन्य जीवनरक्षक उपचार दिए गए। बच्चे की हर सांस पर 24 घंटे निगरानी रखी गई।

लगातार उपचार, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और नर्सिंग स्टाफ की संवेदनशील देखभाल से धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति में सुधार होने लगा। लंबे संघर्ष और कई जटिल चिकित्सीय प्रक्रियाओं के बाद आखिरकार 17 मई 2026 को नवजात को पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

अपने बच्चे को स्वस्थ देखकर माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि उन्होंने बच्चे के बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने न सिर्फ इलाज किया बल्कि हर पल उन्हें हिम्मत और विश्वास भी दिया।

इस संबंध में डॉ. श्रीकांत गिरी ने बताया कि एक किलोग्राम से कम वजन और समय से पूर्व जन्म लेने वाले नवजातों का उपचार बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे बच्चों के फेफड़े, मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते, जिससे सांस लेने और संक्रमण से लड़ने में गंभीर कठिनाइयां आती हैं। उन्होंने कहा कि 28 सप्ताह में जन्मे मात्र 850 ग्राम वजन के बच्चे को स्वस्थ कर घर भेज पाना बिलासपुर के लिए बड़ी उपलब्धि है।

इस सफल उपचार में एनआईसीयू प्रभारी सहित डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. रोशन शुक्ला, डॉ. मोनिका जायसवाल, डॉ. प्रतिभा अग्रवाल, डॉ. नक्षत्र, डॉ. अनुराग कुमार, डॉ. विशाल मांझी और समस्त नर्सिंग एवं सहयोगी स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ को लगातार आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और संक्रमण नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे गंभीर नवजातों को बेहतर और संवेदनशील उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!