

शहर सहित जिलेभर के मंदिरों में शनि जयंती और वट सावित्री व्रत को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर मनाया जाने वाला शनि जन्मोत्सव इस वर्ष 16 मई, शनिवार को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती का शनिवार के दिन आना अत्यंत दुर्लभ संयोग माना जाता है। ऐसा योग लगभग 13 वर्षों बाद बना है। इसके साथ ही रेवती, रोहिणी, भरणी और कृत्तिका नक्षत्रों सहित कई शुभ योगों का संयोग पर्व के महत्व को और बढ़ा रहा है।
चिल्हाटी शनि मंदिर में 51 लीटर तेल से होगा पहला अभिषेक
शनि जयंती को लेकर चिल्हाटी स्थित शनि मंदिर को करीब डेढ़ क्विंटल फूलों से सजाया गया है। मंदिर परिसर में आकर्षक विद्युत सजावट भी की जा रही है। शनि सेवा समिति के सेवक जयेंद्र गोले ने बताया कि सुबह 4 बजे भगवान शनि का 51 लीटर तेल से विशेष अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद दिनभर श्रद्धालु तेल अर्पित कर अभिषेक करेंगे।
समिति के अनुसार भक्तों द्वारा अभिषेक के लिए पूर्व पंजीयन कराया गया है और अनुमान है कि दिनभर में करीब 1000 लीटर तेल भगवान को अर्पित किया जाएगा। श्रद्धालु दीप प्रज्वलित कर शनि देव की पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिर परिसर में लगभग 3 क्विंटल खीर का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
शहर के अन्य मंदिरों में भी होंगे आयोजन
राजकिशोर नगर स्थित शनि मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन किया गया है। यहां सुबह से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो जाएगा। शाम 4 बजे से विशेष पूजा, शनि आरती और भजन-कीर्तन होंगे।
इसके अलावा हरदेवलाल मंदिर, तिफरा काली मंदिर, कुदुदंड काली मंदिर, भैरव बाबा मंदिर सहित शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष अनुष्ठान, हवन और प्रसाद वितरण किया जाएगा। मंदिर समितियों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।
अमावस्या तिथि और शुभ योग का विशेष महत्व
धार्मिक पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5:11 बजे प्रारंभ होकर 17 मई की रात 1:30 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन चंद्रमा राशि परिवर्तन कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे और रोहिणी नक्षत्र के साथ विशेष शुभ संयोग बनाएंगे। सुबह 10:26 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा, इसके बाद शोभन योग प्रारंभ होगा। दोनों योग वैवाहिक सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
दिन की शुरुआत भरणी नक्षत्र से होगी, जो शाम 5:30 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र प्रारंभ होगा।
वट सावित्री व्रत भी कल, महिलाएं करेंगी अखंड सौभाग्य की कामना
शनि जयंती के साथ ही शुक्रवार को वट सावित्री व्रत भी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला या फलाहार व्रत रखेंगी।
पर्व का शुभ काल लगभग 21 घंटे 41 मिनट रहेगा। पूजा का शुभ समय सुबह 7:12 बजे से 8:54 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा।
महिलाएं प्रातः स्नान कर लाल या पीले रंग की साड़ी धारण करेंगी और सोलह श्रृंगार करेंगी। पूजन में सात प्रकार के अनाज, धूप, दीप, घी, फल, फूल, रोली, अक्षत, सिंदूर और कच्चे सूत का उपयोग किया जाएगा। वट वृक्ष के नीचे जल अर्पित कर महिलाएं उसकी परिक्रमा करेंगी और कच्चा सूत या कलावा बांधेंगी। परंपरा के अनुसार 7, 11, 28 या 108 परिक्रमा की जाती हैं। अगले दिन भीगे चने खाकर व्रत का पारण किया जाएगा।
श्री शनि साईं धाम में विश्व शांति के लिए हवन
राजकिशोर नगर स्थित श्री शनि साईं धाम में शनि जयंती और सिद्ध मां अवतारिणी काली फलहारिणी अमावस्या पर विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। मंदिर समिति के अनुसार दोपहर 1 बजे से भोग प्रसाद वितरण किया जाएगा।
शाम 3 बजे से शनि देव की विशेष पूजा, हवन और महाआरती का आयोजन होगा। इसके बाद शाम 7 बजे से मां काली की विशेष पूजा-अर्चना और हवन किया जाएगा। समिति ने बताया कि विश्व शांति और जनकल्याण की कामना से विशेष हवन कराया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काली फलहारिणी अमावस्या पर मां काली की उपासना से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
