तीन माह से वेतन न मिलने पर व्याख्याता पहुँचे हाईकोर्ट, कोर्ट ने 3 सप्ताह में निर्णय का दिया आदेश


मस्तूरी। पीएम श्री सेजेस मस्तूरी में पदस्थ व्याख्याता संजय पाण्डेय को स्वास्थ्यगत कारणों से फरवरी, मार्च एवं अप्रैल 2025 में अवकाश लेना पड़ा। इस दौरान उन्होंने विधिवत तीन माह का मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर नियमानुसार अवकाश स्वीकृति की मांग की, लेकिन प्राचार्य जयप्रकाश ओझा द्वारा इसे मान्य नहीं किया गया।
इसके बाद व्याख्याता ने जिला शिक्षा अधिकारी से भी निवेदन किया, किन्तु वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामला कलेक्टर तक पहुंचा, जहां कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को 7 दिनों के भीतर प्रकरण का निराकरण करते हुए वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए। आरोप है कि कलेक्टर के निर्देश के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने आदेश का पालन नहीं किया।
लगातार तीन माह से वेतन नहीं मिलने और विभागीय स्तर पर समाधान न होने से परेशान होकर संजय पाण्डेय ने लोक शिक्षण संचालनालय से भी गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। अंततः व्याख्याता ने स्वयं (इन पर्सन) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की एकल पीठ में हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने जिला शिक्षा अधिकारी एवं प्राचार्य पीएम श्री मस्तूरी को निर्देशित किया है कि वे संजय पाण्डेय के अभ्यावेदन पर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लें।
इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कई शिक्षकों का वेतन विभिन्न कारणों से रोका जाता है और बाद में रिश्वत लेकर जारी किया जाता है।
बताया जा रहा है कि संजय पाण्डेय ने वेतन रोके जाने के संबंध में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी भी मांगी थी, लेकिन उन्हें जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पूरे मामले में संयुक्त संचालक शिक्षा रामायण प्रसाद आदित्य की भी परोक्ष भूमिका होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिले के अन्य प्रभावित शिक्षकों में भी उम्मीद जगी है कि उन्हें समय पर वेतन मिल सकेगा और अनावश्यक दबाव या भ्रष्टाचार का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मामले में राज्य शासन की ओर से पैरवी अधिवक्ता आदित्य तिवारी द्वारा की गई।

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