
बिलासपुर।
प्रतिबंधित प्लास्टिक डिस्पोजल के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। देवरीखुर्द वार्ड-43 के बूटापारा स्थित एक दुकान पर हुई कार्रवाई के बाद स्वच्छता पेट्रोलिंग टीम और स्थानीय दुकानदार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। मामले में मेयर पति अशोक विधानी का नाम भी सामने आने से विवाद और गहरा गया है।
दोनों पक्षों के अलग-अलग आरोप
स्वच्छता पेट्रोलिंग टीम के प्रभारी दीपक कुमार पंकज के अनुसार, 27 अप्रैल की शाम टीम ने मिश्रा प्रोविजन स्टोर पर छापा मारकर करीब 92 किलो प्रतिबंधित प्लास्टिक डिस्पोजल जब्त किया और नियमानुसार जुर्माना लगाया। उनका आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मेयर पति अशोक विधानी ने फोन कर दबाव बनाया और अभद्र व्यवहार किया।
वहीं दुकान संचालक संदीप मिश्रा ने आरोप लगाया कि टीम ने मौके पर पहुंचते ही 20 हजार रुपये की मांग की। रकम नहीं देने पर कार्रवाई की धमकी दी गई और अंततः 7 हजार रुपये बिना रसीद के वसूल लिए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज उनके पास मौजूद है।
बैक डेट की रसीद पर बढ़ा विवाद
दुकानदार के मुताबिक, 28 अप्रैल को टीम दोबारा दुकान पहुंची और 7 हजार रुपये की बैक डेट में रसीद दी गई। इसी दौरान अशोक विधानी भी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का विरोध किया। विधानी ने आरोप लगाया कि उनके निर्देश के बावजूद टीम ने अवैध वसूली की, जिसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई है।
पेट्रोलिंग टीम ने थाने में की शिकायत
दूसरी ओर, पेट्रोलिंग टीम ने मेयर पति के खिलाफ तोरवा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने कार्रवाई में बाधा डाली और गाली-गलौज की। टीम प्रभारी का कहना है कि जुर्माने की रसीद पहले दिन ही काट दी गई थी और जब्त सामग्री को परिवहन साधन के अभाव में मौके पर नहीं ले जाया जा सका।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
नगर निगम की स्वच्छता पेट्रोलिंग टीम पर अवैध वसूली के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। सामान्य सभा में भी जनप्रतिनिधियों ने टीम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। सभापति विनोद सोनी ने उस दौरान कहा था कि शहर में अवैध वसूली की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
तकनीकी विशेषज्ञ की कमी पर भी सवाल
आलोचकों का कहना है कि प्लास्टिक जब्ती जैसी कार्रवाई में तकनीकी विशेषज्ञ या पर्यावरण विभाग के जानकारों की अनुपस्थिति से कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। साथ ही, कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित रहने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस और प्रशासन की आगामी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
