धनगवां ग्राम पंचायत में करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप, जांच पूरी होने तक खातों पर रोक लगाने की मांग

बिलासपुर। जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत धनगवां में विभिन्न शासकीय योजनाओं में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है। आवेदक संतु यादव ने शिकायत में सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, उपपंत्री तथा आरईएस के अधिकारियों पर मिलकर लगभग एक करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया है। साथ ही जांच पूरी होने तक पंचायत के सभी खातों से राशि आहरण पर रोक लगाने की मांग की गई है।

ज्ञापन में बताया गया है कि पंचायत में मनरेगा, 15वें वित्त आयोग, मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना सहित अन्य मदों में स्वीकृत राशि का दुरुपयोग किया गया है। कई कार्यों में फर्जी मूल्यांकन और सत्यापन कर राशि निकाल ली गई, जबकि जमीन पर कार्य नगण्य या गुणवत्ताहीन बताया गया है।

मनरेगा मद में गड़बड़ी के आरोप

शिकायत के अनुसार अमृत सरोवर निर्माण कार्य में वर्ष 2022 में करीब 17.88 लाख रुपये का आहरण फर्जी मूल्यांकन के आधार पर किया गया, जबकि कार्य अधूरा है। इसी तरह रघुनंदन के घर से हरदी माइनर तक 800 मीटर नाली निर्माण में 17.90 लाख रुपये निकालने का आरोप है, जिसमें वास्तविक कार्य नहीं होने की बात कही गई है।
15वें वित्त आयोग में 47 लाख के गबन का आरोप
ज्ञापन में उल्लेख है कि वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच 15वें वित्त आयोग मद से ग्राम पंचायत खाते से करीब 47 लाख रुपये आहरित किए गए, लेकिन विकास कार्यों में खर्च नहीं कर राशि के गबन की आशंका जताई गई है।

विभिन्न योजनाओं में फर्जी कार्य और घटिया निर्माण

मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत सीसी रोड निर्माण कार्य में 10 लाख रुपये खर्च दर्शाया गया, लेकिन प्राक्कलन के अनुसार कार्य नहीं होने का आरोप है।
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत सामुदायिक शौचालय, बोर खनन, पंप स्थापना, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, कुड़ादान निर्माण जैसे कार्यों में लाखों रुपये आहरित कर फर्जी या घटिया निर्माण करने की शिकायत की गई है।
इसके अलावा कई स्थानों पर एक ही कार्य के लिए अलग-अलग मदों से राशि निकालने का आरोप भी लगाया गया है। उदाहरण के तौर पर सीसी रोड निर्माण के एक ही स्थल पर दो योजनाओं से राशि आहरित कर गबन करने की बात कही गई है।
बोर खनन और पंप स्थापना में अनियमितता
ज्ञापन में कई स्थानों पर बोर खनन और मोटर पंप स्थापना के नाम पर राशि निकालकर कार्य नहीं किए जाने का आरोप है। अलग-अलग वार्डों में 77 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपये तक के कार्य कागजों में पूर्ण दिखाए गए, जबकि मौके पर कार्य नहीं होने की बात सामने आई है।

खेल मैदान और अन्य निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में

हाई स्कूल पकरिया में खेल मैदान समतलीकरण के लिए 5 लाख रुपये आहरित किए जाने के बावजूद कार्य मानक के अनुरूप नहीं होने का आरोप है। इसके अलावा आंगनबाड़ी भवन निर्माण में भी अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई गई है।

उच्च स्तरीय जांच और खातों पर रोक की मांग

आवेदक ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जनपद पंचायत मस्तूरी के अधिकारियों को जांच से अलग रखते हुए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक ग्राम पंचायत के सभी खातों से राशि आहरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
ज्ञापन की प्रतिलिपि उपमुख्यमंत्री, जिला पंचायत सीईओ, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मस्तूरी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष को भी भेजी गई है।
मामले में प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

आरोप बेहद गंभीर है लेकिन इसे लेकर अब तक किसी तरह की कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है, जिसे लेकर क्षेत्र में गहरा असंतोष है। मामले की सच्चाई क्या है, यह जानने के लिए प्रशासन स्तर पर गहरी जांच पड़ताल होनी चाहिए और अगर आरोप सही है तो फिर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी जरूरी है।

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