

बिलासपुर। शहर के सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) में डॉक्टरों ने त्वरित और सटीक उपचार से एक पांच वर्षीय बच्चे की जान बचा ली। खेल-खेल में निगला गया पांच रुपये का सिक्का बच्चे के गले में फंस गया था, जिससे उसकी सांसें उखड़ने लगी थीं। समय रहते की गई एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से महज 20 मिनट में सिक्का निकाल लिया गया।
मंगलवार शाम करीब 7 बजे नितिन नामक बच्चे को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। स्थिति गंभीर थी और बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईएनटी विभाग की एचओडी डॉ. आरती पांडे के निर्देश पर टीम गठित की गई, जिसका नेतृत्व डॉ. विद्याभूषण साहू ने किया।
प्राथमिक जांच और एक्स-रे के बाद रात 8 बजे बच्चे को ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया। चिकित्सकों ने बिना चीरा लगाए एंडोस्कोपी तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में कैमरे की सहायता से सिक्के की सटीक स्थिति देखी गई और विशेष उपकरणों की मदद से उसे सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया।

डॉ. साहू के अनुसार जैसे ही एंडोस्कोप डाला गया, मॉनिटर पर सिक्का स्पष्ट दिखाई दिया। पूरी प्रक्रिया के दौरान एनेस्थीसिया टीम बच्चे के ऑक्सीजन स्तर पर लगातार नजर बनाए हुए थी। करीब 20 मिनट की सावधानीपूर्ण प्रक्रिया के बाद सिक्का सफलतापूर्वक निकाल लिया गया, जिसके बाद बच्चे ने राहत की सांस ली।
वर्तमान में नितिन की स्थिति स्थिर है और वह डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
मामले की जानकारी मिलने पर श्याम बिहारी जायसवाल ने भी हस्तक्षेप करते हुए अस्पताल प्रबंधन को उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। वहीं, डॉ. रमणेश मूर्ति को तत्काल आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
इस सफल उपचार में डॉ. श्वेता मित्तल, डॉ. तन्मय गौतम, डॉ. बरसे महादेव के साथ एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. यशा तिवारी और डॉ. बलदेव नेताम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में इस तरह की घटनाएं अक्सर खेल के दौरान होती हैं, इसलिए अभिभावकों को छोटे वस्तुओं से बच्चों को दूर रखने और सतर्क रहने की आवश्यकता है।
