
शशि मिश्रा

भीषण गर्मी में गांवों के तालाब सूखने की स्थिति में पहुंच चुके हैं ऐसे में उनमें जलभराव का जिम्मा
एक बार फिर जिले के सबसे बड़े
तालाबों में निस्तारी के लिए भरा तालाबों बांध खूंटाघाट पर ही है। निस्तारी में जाएगा पानी जलभराव के उद्देश्य से बांध के गेट 25 अप्रैल से खोले जाएंगे। वैसे तो बांध के गेट तालाबों में जलभराव होने तक खुले रहेंगे, लेकिन कम से कम पंद्रह दिनों तक के लिए गेट खोले जाने की संभावना जताई गई है।
गर्मी के दिनों में जब पानी के लिए चारों ओर हाहाकार मचता है तो इस समस्या का हल ढूंढने लोगों की नजर जिले के सबसे बड़े बांध खारंग जलाशय की ओर ही होती है। इस बार भी ऐसा ही होने वाला है। तालाबों में निस्तारी के लिए पानी भरने बांध के गेट खोलने की मांग वैसे तो अप्रैल के पहले सप्ताह से ही आने लगी थी, लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा अपने स्तर पर कराए गए सर्वे के बाद गांवों में तालाबों में निस्तारी लायक पानी शेष होना पाया गया था। लिहाजा तब बांध के गेट खोलने का निर्णय नहीं लिया गया। आज की स्थिति में अधिकतम तापमान 45 डिग्री पहुंचने को है, ऐसे में तालाब पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं। गांवों से लगातार
बांध से पानी देने की मांग भी आने लगी है। लिहाजा सिंचाई विभाग द्वारा 25 अप्रैल से बांध की दोनों नहरों में पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया है। ज्ञात हो कि दोनों नहरों को मिलाकर बांध से करीब दो सौ तालाबों में जलभराव किया जाता है।
खारंग जलाशय में अभी 84 प्रतिशत जलभराव
खारंग जलाशय में अभी 84 प्रतिशत जलभराव उपलब्ध है, जो कि बांध की काफी अच्छी स्थिति है। इस साल बारिश जल्दी होने के कारण बांध में पर्याप्त जलभराव हुआ था, बल्कि समय से पहले शत प्रतिशत जलभराव भी हो गया था। स्थिति यह थी कि बांध से डेढ़ महीने तक लगातार वेस्टवियर चलता रहा। यही कारण है कि वर्तमान में बांध में जलभराव की स्थिति काफी अच्छी है।
25 को खोल सकते हैं बांध के गेट
25 अप्रैल को सुबह 11 बजे से खारंग जलाशय के गेट खोले जा सकते हैं। गांव के तालाब सूखने की स्थिति में आ जाने के कारण निस्तारी के लिए बांध से पानी की मांग की जाने लगी थी। बांध में अभी 84 प्रतिशत जलभराव उपलब्ध है, जो कि काफी अच्छी स्थिति है।
