

अक्षय तृतीया इस वर्ष 19 अप्रैल को अत्यंत शुभ संयोगों के साथ मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 10:50 बजे से तृतीया तिथि प्रारंभ होकर अगले दिन 20 अप्रैल की सुबह 7:28 बजे तक रहेगी। लगभग 20 घंटे 38 मिनट तक रहने वाले इस अबूझ मुहूर्त में विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों के लिए दिनभर शुभ समय रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग, शोभन योग, गजकेसरी योग और मालव्य राजयोग जैसे कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।

इसी अवसर पर शहर में सामूहिक विवाह आयोजनों की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। शोभा टाह फाउंडेशन द्वारा 13वें वर्ष भी सामूहिक विवाह का आयोजन 19 अप्रैल को जूनी लाइन स्थित अग्रवाल भवन में किया जाएगा। इस वर्ष 11 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधेंगे। आयोजन से पहले सभी जोड़ों का सत्यापन कर लिया गया है। बुधवार को संस्थापक अनिल टाह द्वारा सभी वर-वधुओं को शादी के जोड़े प्रदान किए गए। वधुओं को साड़ी, श्रृंगार सामग्री और चुनरी दी गई, वहीं वरों को भी विवाह के वस्त्र दिए गए।
विवाह समारोह वैदिक परंपरा के अनुसार गायत्री परिवार के आचार्यों द्वारा संपन्न कराया जाएगा। हल्दी, तेल सहित सभी पारंपरिक रस्में विधि-विधान से पूरी कराई जाएंगी। इसके साथ ही कन्याओं को गृहस्थी के उपयोगी सामान उपहार स्वरूप दिए जाएंगे और उनके श्रृंगार के लिए पार्लर की व्यवस्था भी की गई है।
दूसरी ओर, रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर ट्रस्ट द्वारा भी सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है। यहां 200 से अधिक जोड़ों ने पंजीयन कराया है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आवेदनों की जांच की जा रही है और ट्रस्ट द्वारा विवाह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व भी विशेष माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ कभी समाप्त न होने वाला होता है, इसलिए इस दिन किए गए जप, तप, दान-पुण्य और शुभ कार्यों का फल अक्षय माना जाता है। इस दिन सोना खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है, जिसे समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा, तेलुगू संयुक्त समाज कल्याण समिति की महिला विंग द्वारा पारंपरिक गुड्डा-गुड़िया विवाह का आयोजन भी 19 और 20 अप्रैल को किया जाएगा। कासिमपारा में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 19 अप्रैल को हल्दी, मेहंदी और संगीत का आयोजन होगा, जबकि 20 अप्रैल को बारात निकालकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराया जाएगा।
अक्षय तृतीया पर आयोजित ये सामूहिक विवाह न केवल सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोग भी साबित होते हैं।
