
शशि मिश्रा

बिलासपुर। सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब भाजपा की युवा नेत्री गौरी गुप्ता को अंदर जाने से रोक दिया गया। मौके पर खुद को भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष बताने वाली गौरी गुप्ता पुलिस के इस व्यवहार से नाराज हो गईं और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से तीखी बहस करने लगीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गौरी गुप्ता सर्किट हाउस पहुंचीं और भीतर जाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इसी बात पर विवाद शुरू हो गया। गौरी गुप्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बदतमीजी की और एक महिला कांस्टेबल ने उन्हें पकड़कर खींचा, जिससे वह और अधिक आक्रोशित हो गईं।

इस दौरान उन्होंने कहा कि “हम कार्यकर्ता हैं, बेवकूफ नहीं हैं, हमारी ही पार्टी का मुख्यमंत्री है, हम नहीं मिलेंगे तो कौन मिलेगा।” गोरी ने यह भी कहा कि एसपी से ज्यादा बदतमीजी तो कांस्टेबल करते हैं।
घटना के दौरान गेट पर तैनात एएसआई द्वारा उन्हें शांत कराने की कोशिश की गई, लेकिन काफी देर तक बहस और हंगामा चलता रहा। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, गौरी गुप्ता लगातार पुलिसकर्मियों को खरी-खोटी सुनाती रहीं, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
सूत्रों की मानें तो यह मामला मुख्यमंत्री तक भी पहुंच गया है और उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की है। इसके बाद खुफिया विभाग ने भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इस घटना ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि गौरी गुप्ता अंबिकापुर की निवासी हैं और पेशे से अधिवक्ता हैं। छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू कर उन्होंने भाजपा संगठन में तेजी से पहचान बनाई है और उन्हें नगर विधायक अमर अग्रवाल के करीबी नेताओं में गिना जाता है। पार्टी के कई कार्यक्रमों में उन्हें मंच पर प्रमुख स्थान मिलता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सर्किट हाउस में प्रवेश नहीं मिलने और खुद को नजरअंदाज किए जाने की भावना के चलते उनकी नाराजगी सामने आई। फिलहाल यह घटना शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है और इससे पार्टी के भीतर अनुशासन और समन्वय को लेकर भी सवाल उठने लगे
