

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हिंदू नव वर्ष के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरती इस शोभायात्रा में एक से बढ़कर एक आकर्षक और जीवंत झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिन्होंने लोगों का मन मोह लिया।
इस भव्य आयोजन में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहे भगवान श्री राम के बाल स्वरूप में सजे बालक शौर्य गोयल। बालक के दिव्य रूप और भाव-भंगिमा ने ऐसा वातावरण बना दिया मानो स्वयं प्रभु श्रीराम साक्षात उपस्थित हों। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर शौर्य के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते नजर आए, वहीं उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए लोगों में खासा उत्साह देखा गया।

शाम 4 बजे से लेकर रात लगभग 10 बजे तक शौर्य गोयल पूरे समय प्रभु श्रीराम के स्वरूप में शोभायात्रा में शामिल रहे और भक्तों को मुस्कुराते हुए आशीर्वाद देते रहे। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में लोगों ने उन्हें ‘बाल संत’ और “पुण्यी बाबा” के रूप में संबोधित किया।
शौर्य गोयल के दादा पवन गोयल, जो पेशे से पत्रकार होने के साथ-साथ राष्ट्रवादी और हिंदूवादी विचारधारा से जुड़े हुए हैं, का उनके जीवन पर विशेष प्रभाव बताया जा रहा है। परिवार के अनुसार, शौर्य बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के हैं और अधिकांश समय अपने दादा के साथ धार्मिक गतिविधियों में व्यतीत करते हैं।
बताया जाता है कि मात्र 2 वर्ष की आयु में ही शौर्य घर में पूजा-पाठ की क्रियाएं करते हैं और परिवारजनों को तिलक लगाते हैं। उनके इस व्यवहार को परिवार और आसपास के लोग अद्भुत मानते हैं। जब भी वह रोते हैं, तो “हनुमान भक्त नहीं रोता” कहने पर तुरंत शांत हो जाते हैं और घर में रखी हनुमान जी की गदा उठाकर खेलने लगते हैं।
शौर्य को अक्सर अपने दादा के साथ मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में देखा जाता है, जहां वह विशेष अंदाज में “जय श्रीराम” का उद्घोष करते हैं। शोभायात्रा के दौरान भी पुलिसकर्मियों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उन्हें नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सदर बाजार क्षेत्र में जब शौर्य बाल रूप में पहुंचे, तो श्रद्धालुओं ने उन्हें मिष्ठान अर्पित कर अपनी आस्था प्रकट की। कई लोगों ने उनके स्वरूप में प्रभु श्रीराम के बाल रूप का अनुभव करते हुए भक्ति भाव से उनका स्वागत किया।
सोशल मीडिया पर भी इस बाल संत की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रही हैं, जहां हजारों लोग उनकी भक्ति और अद्भुत व्यक्तित्व की सराहना कर रहे हैं।
परिजनों और स्थानीय लोगों का मानना है कि शौर्य गोयल में बचपन से ही आध्यात्मिक गुण दिखाई दे रहे हैं और भविष्य में वह एक बड़े हनुमान भक्त के रूप में प्रसिद्ध हो सकते हैं।
यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि समाज में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को भी मजबूत करने का संदेश देती नजर आई।
