

शहर के व्यस्ततम इलाके तेलीपारा में नगर निगम के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक दुकानदार ने अपनी दुकान के सामने सार्वजनिक जमीन पर अवैध रूप से लोहे के भारी-भरकम एंगल और पाइप खड़े कर दिए हैं। सपना चश्मा घर के विज्ञापन बोर्ड लगाने के बहाने लगाए गए ये लोहे के एंगल राहगीरों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ साबित हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

स्थानीय निवासियों और राहगीरों का आरोप है कि ये एंगल सड़क की सीमा में इस कदर बाहर निकले हुए हैं कि पैदल चलने वालों को उनसे टकराकर चोट लगना आम बात हो गई है। खासकर रात के अंधेरे में या भीड़भाड़ के समय ये लोहे के नुकीले कोने किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कई बुजुर्ग और बच्चे इन एंगल्स की चपेट में आकर घायल हो चुके है।

सूत्रों की मानें तो इस अवैध निर्माण की शिकायत नगर निगम के संबंधित विभाग और क्षेत्रीय अधिकारियों से कई बार की जा चुकी है। बावजूद इसके, आज तक इसे हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मोहल्ले के लोगों का सीधा आरोप है कि दुकानदार और निगम के कुछ कर्मचारियों के बीच आपसी लेनदेनऔर रियायतका खेल चल रहा है, जिसके कारण जनता की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है।

दरअसल अतिक्रमण करते हुए विज्ञापन बोर्ड लगाने के नाम पर लोहे के एंगल लगाए गए थे लेकिन नगर निगम की कार्रवाई के बाद ऊपरी हिस्सा तो हटा दिया गया लेकिन नीचे का हिस्सा खतरनाक रूप से अब भी मौजूद है। नगर निगम द्वारा इसे हटाने की चेतावनी दी गई थी लेकिन दुकानदार द्वारा इस ओर कोई प्रयास नहीं किया गया। यह इतना खतरनाक है कि पिछले दिनों एक कार इसकी चपेट में आ गया और एक पल में उसके दस हजार रुपये कीमती नए टायर पूरी तरह फट गए। यानी इस तरह के हादसे होने का अंदेशा बरकरार है । इसकी जानकारी दुकान संचालक को भी है लेकिन फिर भी वे लापरवाह बने हुए हैं।

नियमों के अनुसार, किसी भी निजी दुकान का हिस्सा सार्वजनिक सड़क या फुटपाथ पर नहीं आ सकता। विज्ञापन बोर्ड के लिए लोहे के ढांचे खड़ा करना न केवल अतिक्रमण है, बल्कि जन-सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन भी है। अब सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम प्रशासन किसी बड़ी जनहानि या मौत का इंतज़ार कर रहा है, या फिर भ्रष्टाचार की इस ‘लोहे की दीवार’ को ढहाया जाएगा?

