तारबाहर वार्ड 29 में उपचुनाव की सरगर्मी तेज, कांग्रेस गफ्फार परिवार पर दांव, भाजपा को भी मुस्लिम चेहरे की तलाश


बिलासपुर। तारबाहर क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 29 संजय गांधी नगर में उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही स्थानीय राजनीति गरमा गई है। शेख असलम के निधन से खाली हुई इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। निर्वाचन कार्यालय द्वारा मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के साथ ही यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि चुनाव अब नजदीक है।


निर्वाचन कार्यालय ने वार्ड 29 के लिए रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त कर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम शुरू कर दिया है। जारी कार्यक्रम के अनुसार 5 मई को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा, जिसके बाद कभी भी चुनाव कार्यक्रम घोषित हो सकता है। ऐसे में मई माह में मतदान होने की संभावना जताई जा रही है।


राजनीतिक दृष्टि से यह वार्ड लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। गफ्फार परिवार का इस क्षेत्र में मजबूत प्रभाव रहा है, जिसके चलते कांग्रेस एक बार फिर पारिवारिक समीकरण पर दांव लगाने की तैयारी में है। संभावित उम्मीदवारों में स्वर्गीय शेख असलम के बेटे शेख अजीम सन्त्री का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, वहीं शेख तस्लीम राजा का नाम भी चर्चा में है।


दूसरी ओर भाजपा इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए सामाजिक समीकरण बदलने की रणनीति पर काम कर रही है। मुस्लिम बहुल इस वार्ड को देखते हुए पार्टी मुस्लिम प्रत्याशी उतारने पर विचार कर रही है। हालांकि कांग्रेस की मजबूत पकड़ के कारण भाजपा के सामने एक प्रभावी और स्वीकार्य चेहरा तलाशना चुनौती बना हुआ है। पार्टी में वी. मधुसूदन राव, राजेश रजक, मुनीश गुप्ता और संध्या चौधरी जैसे नामों पर भी मंथन जारी है।


गौरतलब है कि वार्ड 29 निगम का ऐसा पहला वार्ड बनने जा रहा है, जहां पिछले सवा छह वर्षों में दूसरी बार उपचुनाव हो रहा है। वर्ष 2019 में शेख गफ्फार के निधन के बावजूद वे चुनाव जीते थे। इसके बाद शेख असलम पार्षद बने और 2025 में पुनः जीत हासिल की, लेकिन अक्टूबर में उनके निधन के चलते सीट एक बार फिर रिक्त हो गई।
मतदाता सूची का कार्यक्रम इस प्रकार है:
13 अप्रैल: प्रारंभिक प्रकाशन
20 अप्रैल: दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि
23 से 27 अप्रैल: दावा-आपत्तियों का निराकरण
29 अप्रैल: संशोधन प्रविष्टि
5 मई: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बार के उपचुनाव में मतदाता किस पर भरोसा जताते हैं और वार्ड 29 की राजनीतिक दिशा क्या मोड़ लेती है।

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