अपोलो अस्पताल में एमवीएसएसवाय के तहत डायलिसिस सेवा बंद, विधानसभा में उठा मामला


बिलासपुर। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना (एमवीएसएसवाय) के अंतर्गत अपोलो अस्पताल में किडनी फेल्योर से पीड़ित मरीजों को दी जा रही डायलिसिस सुविधा फिलहाल बंद कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधन को लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण यह सेवा रोक दी गई है। इस मुद्दे को कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने विधानसभा में उठाया।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि अपोलो अस्पताल में पहले संजीवनी सहायता कोष के तहत वर्ष 2018 से 2020 तक और उसके बाद वर्ष 2020 से मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत डायलिसिस सुविधा प्रदान की जा रही थी। वर्तमान में इस योजना के तहत 62 मरीज नियमित रूप से डायलिसिस करा रहे थे।
मंत्री ने बताया कि कुछ प्रकरणों में अस्पताल प्रबंधन को भुगतान नहीं होने के कारण अपोलो अस्पताल ने इस योजना के तहत डायलिसिस सेवा बंद कर दी है। हालांकि शासन द्वारा मरीजों के उपचार के लिए जिले के शासकीय अस्पतालों और योजना के तहत पंजीकृत निजी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि सिम्स मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के अलावा श्रीराम केयर हॉस्पिटल, मार्क हॉस्पिटल, सनशाइन हॉस्पिटल, आरबी हॉस्पिटल, श्री कृष्णा हॉस्पिटल, श्री मंगला हॉस्पिटल, आराध्या हॉस्पिटल, न्यू वंदना हॉस्पिटल, शिवा मेडिसिटी हॉस्पिटल और अरपा मेडिसिटी हॉस्पिटल में योजना के तहत निःशुल्क डायलिसिस कराया जा सकता है।
मरीजों को हो रही परेशानी


अपोलो अस्पताल में योजना के तहत इलाज बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किडनी फेल्योर के मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस कराना पड़ता है। निजी अस्पतालों में एक सत्र का खर्च हजारों रुपये तक आता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया है।
भुगतान लंबित होने का हवाला
अपोलो अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत डायलिसिस सेवा शुरू होने के बाद से अब तक उन्हें शासन से कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। लगातार भुगतान लंबित रहने के कारण अस्पताल ने योजना के तहत डायलिसिस सेवा बंद करने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी मरीजों के परिजनों को भी दे दी गई है।
इधर परिजनों का कहना है कि वे योजना के भरोसे इलाज करा रहे थे, लेकिन अचानक सेवा बंद होने से उन्हें मजबूरी में निजी खर्च पर डायलिसिस कराना पड़ रहा है।
आयुष्मान योजना को लेकर भी उठा सवाल
विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने अपोलो अस्पताल में आयुष्मान योजना लागू नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2021 से 2026 के बीच अपोलो प्रबंधन को सात बार पत्र लिखे गए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने के बाद ही उसे आयुष्मान योजना में शामिल किया जा सकेगा।

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